उज्‍जैन न्यूज़ (Ujjain News)

सावन की अंतिम सवारी को ही शाही का दर्जा मिलना चाहिए

  • मंदिर समिति की सनक से श्रद्धालुओं में फैल रहा भ्रम

उज्जैन। आज कार्तिक-अगहन की आखिरी सवारी निकलेगी और उसे भी सावन भादौ की शाही सवारी की तरह मंदिर समिति द्वारा प्रचारित किया जा रहा है। जबकि पौराणिक महत्व के अनुसार शुरु से ही शाही सवारी भादौ की ही रहती है लेकिन अब इस सवारी को भी शाही कहा जा रहा है जिससे कई तरह का भ्रम फैल रहा है। परंपराओं एवं प्रचलित मान्यताओं के साथ छेड़छाड़ वे लोग कर रहे हैं जो कि नए नवैले और अनुभवहीन हैं।



कार्तिक-अगहन मास की अंतिम सवारी आज शाम 4 बजे महाकालेश्वर मंदिर में भगवान के चंद्रमोलेश्वर स्वरूप का पूजन-अर्चन करने के बाद रजत पालकी में सवार होकर मुख्य द्वार से रवाना होगी। यहां सशक्त पुलिस बल की टुकड़ी गॉड ऑफ आनर देगी। उसके बाद 7 किमी लंबे सवारी मार्ग पर शाही कारवां आगे बढ़ेगा। इसमें पालकी के आगे घुड़सवार दल, मंदिर के पंडे पुजारी, भजन मंडलियां और अधिकारी शामिल रहेंगे। सवारी मुख्य द्वार से होकर गुदरी चौराहा, कहारवाड़ी होते हुए रामघाट पहुंचेगी, यहां पालकी पूजन होगा। इसके बाद यहां से गणगौर दरवाजा, कार्तिक चौक, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, तेलीवाड़ा होते हुए सतीगेट से गोपाल मंदिर, पटनी बाजार होकर वापस महाकाल मंदिर पहुंचेगी। इधर आज सोमवार के कारण महाकालेश्वर मंदिर में सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ नजर आ रही थी। हालांकि सुबह 11 बजे तक 7 किमी लंबे सवारी मार्ग पर यातायात व्यवस्था बदहाल थी। गुदरी चौराहा से लेकर पटनी बाजार और ढाबा रोड से लेकर टंकी चौराहे तक जाम की स्थिति बनी हुई थी। महाकाल मंदिर क्षेत्र में भी चारो ओर ई-रिक्शा व ऑटो चालकों के कारण सड़कें जाम थी और श्रद्धालु परेशान हो रहे थे।

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