
उज्जैन। कुपोषित बच्चों की पहचान और उपचार जैसे संवेदनशील मुद्दे पर महिला एवं बाल विकास विभाग की लापरवाही अब खुलकर सामने आ गई है। जिला स्वास्थ्य समिति और जिला पोषण समिति की बैठक में हालात देखकर कलेक्टर बेहद नाराज हुए। उन्होंने महिला बाल विकास विभाग के जवाबदारों से आंकड़ों में गड़बड़ी, फील्ड से दूरी और कमजोर मॉनिटरिंग को लेकर सवाल किए और वेतन वृध्दि रोकने और निलंबन जैसी कार्रवाई के आदेश दिए।
स्वास्थ्य समिति की समीक्षा बैठक में विगत दिवस कलेक्टर रोशन कुमार सिंह के सामने आया कि कुपोषित बच्चों की रिकवरी दर बेहद कम है, जबकि कागजों में योजनाएं तेजी से चलती दिखाई जा रही हैं। इस जमीनी हकीकत बनाम पोर्टल डेटा के अंतर देख उन्होंने महिला बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी के समक्ष नाराजगी जताई और विभाग के जवाबदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।
वेतन वृद्धि रोकी, निलंबन और सेवा समाप्ति
कुपोषित बच्चों को चिन्हित करने और उन्हें समय पर उपचार नहीं मिलने जैसी लापरवाही पर कलेक्टर ने बड़ा एक्शन लेते हुए 13 बाल विकास परियोजना अधिकारियों (सीडीपीओ)की दो-दो वेतन वृद्धि रोक दी। साथ ही एक पर्यवेक्षक को तत्काल निलंबित कर दिया गया, जबकि जिला समन्वयक की सेवा समाप्त करने का नोटिस जारी किया गया। इसमें अर्चना दलाल, प्रीति कटारा, रीना सोलंकी, नीलम सेठिया, अनुपमा मंडावी, मनोज जाट, मुकेश वर्मा, प्रियंका जायसवाल, ज्योत्सना दीक्षित, सुलोचना सैनी (पर्यवेक्षक), प्रीति श्रीवास्तव (पर्यवेक्षक), प्रेमलता ठाकुर, हितेश कुंवर (पर्यवेक्षक) शामिल है। वहीं पर्यवेक्षक प्रीति श्रीवास्तव को बैठक से अनुपस्थित रहने पर निलंबित किया गया, जबकि जिला समन्वयक रोहित हिरवे की सेवा समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
डेटा में गड़बड़ी, विभागों में तालमेल का अभाव
महिला एवं बाल विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग के एएनसी पोर्टल के आंकड़ों में भारी अंतर पाया गया। गर्भवती महिलाओं की वास्तविक संख्या तक स्पष्ट नहीं हो सकी। बडऩगर के सीडीपीओ सक्रिय प्रसूतियों और गर्भवती महिलाओं का सही ब्योरा तक नहीं दे सके, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई। वहीं गर्भवती महिलाओं में गंभीर एनीमिया के प्रबंधन का प्रतिशत बेहद कम पाया गया। कलेक्टर ने इसे 100 प्रतिशत करने के निर्देश दिए और कहा कि सभी प्रसूतियां संस्थागत होना अनिवार्य है, जिसकी जिम्मेदारी सीधे बीएमओ पर तय होगी।
फील्ड से दूरी पर फटकार
कलेक्टर ने साफ कहा कि फील्ड में रहिए, तभी हकीकत समझ आएगी। निर्देश दिए गए कि सभी सीडीपीओ और सुपरवाइजर रोज सुबह 8 बजे रेंडम आंगनवाड़ी केंद्रों पर पहुंचें और तत्काल रिपोर्ट दें। एसडीएम को भी निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
योजनाओं में भी लापरवाही
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में भी अधूरी जानकारी सामने आई। कलेक्टर ने सख्त निर्देश दिए कि सभी पात्र महिलाओं का डेटा अनमोल पोर्टल पर शत-प्रतिशत दर्ज किया जाए। इसमें किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कलेक्टर ने दो टूक कहा कि अगर सीडीपीओ और बीएमओ अपने दायित्वों का निर्वहन सही ढंग से नहीं करते हैं, तो निलंबन जैसी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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