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क्षेत्रीय दलों की आय में भारी गिरावट, खर्च बढ़ने से बिगड़ा वित्तीय संतुलन: एडीआर रिपोर्ट

May 29, 2026

नई दिल्ली। देश के क्षेत्रीय राजनीतिक दलों (Regional Political Parties) की आर्थिक स्थिति को लेकर चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (Association for Democratic Reforms (ADR) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2024-25 में क्षेत्रीय दलों की आय में 51 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई, जबकि उनका कुल खर्च लगातार बढ़ता रहा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 36 क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के ऑडिट खातों के विश्लेषण में यह सामने आया कि इन दलों की कुल आय 2024-25 में घटकर 1,192.94 करोड़ रुपये रह गई। इससे पिछले वित्तीय वर्ष 2023-24 में इनकी कुल आय 2,463.17 करोड़ रुपये थी। इस तरह एक साल में इन दलों की आय में करीब 1,270 करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई।


  • खर्च आय से भी ज्यादा

    आय घटने के बावजूद राजनीतिक दलों के खर्च में कमी नहीं आई। रिपोर्ट के अनुसार, इन 36 दलों का कुल खर्च 1,433.07 करोड़ रुपये रहा, जो उनकी कुल आय से करीब 240 करोड़ रुपये अधिक है। पिछले साल की तुलना में खर्च में लगभग 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

    सबसे अहम बात यह रही कि विश्लेषण में शामिल 36 में से 21 राजनीतिक दलों ने अपनी घोषित आय से ज्यादा खर्च किया।

    पांच बड़े दलों का दबदबा

    Association for Democratic Reforms की रिपोर्ट के मुताबिक, शीर्ष पांच क्षेत्रीय दलों की हिस्सेदारी कुल आय का लगभग 69 प्रतिशत और कुल खर्च का 77 प्रतिशत से अधिक रही। इससे स्पष्ट होता है कि कुछ बड़े क्षेत्रीय दलों का आर्थिक प्रभाव अब भी काफी मजबूत बना हुआ है।

    कई बड़े दलों ने नहीं सौंपी ऑडिट रिपोर्ट

    रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि देश के 67 मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय दलों में से 31 दल तय समय सीमा के भीतर अपनी ऑडिट रिपोर्ट जमा नहीं कर सके।

    Election Commission of India ने सभी क्षेत्रीय दलों को 31 अक्टूबर 2025 तक ऑडिट रिपोर्ट जमा करने के निर्देश दिए थे, लेकिन 27 मई 2026 तक भी कई दलों ने दस्तावेज नहीं सौंपे।

    रिपोर्ट जमा न करने वाले प्रमुख दलों में Dravida Munnetra Kazhagam (DMK), Shiv Sena, Shiv Sena (UBT), Nationalist Congress Party और Jammu and Kashmir National Conference शामिल हैं।

    एडीआर के अनुसार, केवल 15 दलों ने समय पर अपनी ऑडिट रिपोर्ट जमा की, जबकि 21 दलों ने दो दिन से लेकर 96 दिन तक की देरी की। रिपोर्ट ने राजनीतिक दलों की वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

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