
उज्जैन। इस बार डेंगू बीमारी के मरीज कम आए हैं जबकि पिछले साल यह संख्या अधिक थी। पिछले 10 महीनों में उज्जैन में मच्छर जनित बीमारियों को लेकर बेहतर काम किया गया है। यही कारण है कि मलेरिया और डेंगू के केस काफी कम हो गए हैं। आंकड़ों की बात करे तो इस साल अब तक चिकनगुनिया का एक भी मरीज नहीं मिला हैं, वहीं मलेरिया के 5 और डेंगू के 4 पॉजिटिव मरीज मिले हैं। जबकि पिछले साल इसी अवधि में डेंगू के 22 मरीज मिले थे।
जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि पांच साल पहले चिकनगुनिया और मलेरिया का नाम सुनते ही मरीजों के हाथ-पैर कांपने लगते थे। ओपीडी में लंबी कतारे और बुखार में तपते कांपते बच्चे इलाज के लिए लाइन में अपनी बारी का इंतजार करते दिखाई देते थे, लेकिन इस साल अब तक चिकनगुनिया का एक भी मरीज सामने नहीं आया है। वहीं, मलेरिया के 5 और डेंगू के 4 मरीज मिले हैं। लेकिन पिछले पांच साल पहले की बात करें तो वर्ष 2020 में 8 और 2021 में उज्जैन में मलेरिया के 5 मरीज मिले थे। वहीं साल 2022 और 2023 में शून्य, 2024 में 22 मामले सामने आए थे। वहीं इस साल अब तक 5 मलेरिया और 4 डेंगू पॉजिटिव मरीज सामने आया हैं। इतना ही नहीं, जनवरी 2026 से 30 सितम्बर 2026 तक एक लाख से ज्यादा लोगों के सैंपलों की जांच हुई और सभी नेगेटिव निकले हैं। बता दें कि मादा एनाफिलीज मच्छर जो साफ और ठहरे पानी में 20 एमएल से भी कम मात्रा में अंडे देता है, उसकी पूरी साइकल पर अब नजर रखी जा रही है। विभाग और आमजन की जागरूकता ने बड़ा असर दिखाया। वहीं विभाग ने भी समय समय पर रथ निकालकर गांवों में जांच शिविर लगाकर, नुक्कड़ नाटक और पंपलेट से जानकारी फैलाई। इसके अलावा फॉगिंग और एंटी लार्वा छिड़काव भी किया गया। यह बचाव अभियान उज्जैन जिले में निरंतर चलाया जा रहा हैं।