
उज्जैन। विद्युत मंडल में भ्रष्टाचार का बोलबाला है और स्मार्ट मीटर दलालों केमाध्यम से बेचे जा रहे हैं। इस कारण 6 हजार का स्मार्ट मीटर 10 से 12 हजार में लग रहा है और विद्युत मंडल के अधिकारी सौर ऊर्जा की बिजली के लिए सोलर पैनल लगाने की अनुमति नहीं दे रहे हैं जिसके कारण यह कार्य रूका हुआ है।
स्मार्ट मीटर की कमी के कारण शहर के अधिकांश जोन कार्यालयों में उपभोक्ताओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और इस स्थिति का फायदा उठाकर कुछ दलालों ने स्मार्ट मीटरों की कालाबाजारी शुरू कर दी है। बीते कुछ महीनों से बिजली कार्यालयों के स्टोर में नए स्मार्ट मीटरों का स्टॉक खत्म हो गया। स्मार्ट मीटर नहीं होने से नए कनेक्शन जारी करने की व्यवस्था पूरी तरह से बिगड़ गई हैं। सबसे ज्यादा परेशानी सोलर कनेक्शन (सिन्गल फेस) वाले उपभोक्ताओं को आ रही हैं। हालात यह हैं महानंदा, महाश्वेता, मक्सी रोड और खेड़ापति जोन में सोलर कनेक्शन में स्मार्ट मीटर की जरूरत के लिए उपभोक्ता प्रतिदिन कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। ऐसे में मीटर नहीं होने की स्थिति में उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ी हुई है। वहीं इस स्थिति का फायदा उठाकर बिजली कंपनी के दलालों एवं सोलर वेंडरों ने स्मार्ट मीटर की कालाबाजारी भी शुरू कर दी हैं। ऐसे में 5 से 6 हजार रुपए में आने वाला सिंगल फेस स्मार्ट मीटर 10 से 12 हजार में और 15 से 16 हजार में आने वाला थ्री फेस स्मार्ट मीटर इन दिनों 22 से 25 हजार में उपलब्ध कराया जा रहा हैं। मामले में बिजली कम्पनी के अधिकारियों का कहना है कि बिजली कम्पनी के कार्यालयों में स्मार्ट मीटर का स्टॉक खत्म हो गया है। मुख्यालय से मीटर उपलब्ध कराने की मांग की गई है। नया स्टॉक आने के बाद स्थिति सामान्य हो जाएगी।
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