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वायुसेना में ‘हथियार प्रणाली शाखा’ की क्या है जरूरत, यह कैसे करेगी काम? जानिए सबकुछ

नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना ने भविष्य की चुनौतियों और बदलते युद्ध क्षेत्र की लड़ाई के लिए तैयारी शुरू कर दी है। इसके तहत आज वायुसेना दिवस के मौके पर वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी ने हथियार प्रणाली शाखा (Weapon System Branch) के गठन की मंजूरी दे दी। उन्होंने कहा, इस ब्रांच से उड़ान प्रशिक्षण में 3,400 करोड़ रुपये की बचत होगी।

वायुसेना में हथियार प्रणाली शाखा के गठन के साथ सवाल भी उठते हैं कि आखिर क्या है वेपन सिस्टम ब्रांच? यह कैसे काम करेगी? वायुसेना में इसकी जरूरत क्या थी? अब तक कौन-कौन सी ब्रांच वायुसेना में हैं? इन सभी सवालों के जवाब आगे पढ़िए…

क्या है वेपन सिस्टम ब्रांच?
वायुसेना में अभी तक तीन ब्रांचों का परिचालन होता है। ये तीन ब्रांच हैं- फ्लाइंग ब्रांच, टेक्निकल ब्रांच और ग्राउंड ड्यूटीज ब्रांच। आजादी के बाद यह पहली बार है कि वायुसेना में चौथी व एक नई परिचालन ब्रांच का गठन किया जा रहा है। यह ब्रांच विमानों में हथियार प्रणाली का संचालन करेगी। इस ब्रांच की चार सब स्ट्रीम बनाई गई हैं, जो हैं- फ्लाइंग, रिमोट, इंटेलीजेंस व सरफेस।

इन सब स्ट्रीम में क्या होगा?
वेपन सिस्टम ब्रांच की फ्लाइंग स्ट्रीम ट्विन-सीट या मल्टी-क्रू एयरक्राफ्ट में सिस्टम ऑपरेटर शामिल होंगे। वहीं रिमोट स्ट्रीम पायलट रहित विमानों व ड्रोन के लिए होगा। इंटेलिजेंस सब-स्ट्रीम में इमेज खुफिया जानकारियों का विश्लेषण, इंफॉर्मेशन वारफेयर स्पेशलिस्ट और रिमोट-पायलट एयरक्राफ्ट और स्पेस-बेस्ड सिस्टम के लिए सिग्नल इंटेलिजेंस ऑपरेटर शामिल होंगे। इसी तरह सरफेस स्ट्रीम सतह से हवा में लक्षित हथियारों और सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलों के लिए कमांडरों और ऑपरेटरों को नियुक्त करेंगी।

अब जानिए इस नई ब्रांच का मुख्य कार्य
वायुसेना प्रमुख ने इसकी जानकारी खुद दी है। वायुसेना के दिवस के मौके पर उन्होंने कहा कि हथियार प्रणाली शाखा अनिवार्य रूप से सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलों, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों, पायलट रहित विमानों और दो व बहु-चालक दल वाले विमानों में हथियार प्रणाली का संचालन करेगी। वायुसेना प्रमुख ने कहा कि इस शाखा के बनने से उड़ान प्रशिक्षण पर खर्च कम होने से 3,400 करोड़ रुपये से अधिक की बचत होगी।

नई ब्रांच की जरूरत क्यों पड़ी?
दुनिया की सभी सेनाएं अपनी क्षमताओं में लगातार बदलाव कर रही हैं। हालिया या निकटतम युद्धों पर गौर करें तो बदलते परिदृश्य में वायुसेना की उपयोगिता बहुत अधिक बढ़ गई है। युद्ध क्षेत्र के साथ ही साथ युद्ध करने का तरीका बदल रहा है। सामरिक विशेषज्ञ इस बात पर भी जोर दे रहे हैं कि आने वाले समय में हमारे सामने एक अदृश्य दुश्मन होगा। ऐसे में हमें अभी से तैयारियां शुरू करनी होंगी।

अब वायुसेना में पहले से मौजूद तीन अन्य ब्रांचों के बारे में-

1. फ्लाइंग ब्रांच का क्या काम है?
वायुसेना की इस ब्रांच का मुख्य काम लड़ाकू पायलट, हेलीकाप्टर पायलट व परिवहन पायलट को प्रशिक्षित करना है। इस ब्रांच की तीन सब स्ट्रीम हैं- फाइटर्स, ट्रांसपोर्ट और हेलीकॉप्टर्स।

2. टेक्निकल ब्रांच क्या करता है?
वायुसेना की तकनीकि ब्रांच इस बात का प्रबंधन करती है कि भारतीय वायुसेना उड़ान योग्य बनी रहे। यह ब्रांच तकनीकी रूप से प्रशिक्षण भी प्रदान करती है। इसकी दो सब स्ट्रीम हैं- मैकेनिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स।

3. ग्राउंड ड्यूटी ब्रांच का काम?
मानव और भौतिक संसाधनों के प्रबंधन के लिए वायु सेना की ग्राउंड ड्यूटी ब्रांच है। इसकी पांच सब स्ट्रीम हैं – प्रशासन, आकउंट्स, लॉजिस्टिक, एजुकेशन व मौसम विज्ञान।

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