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महर्षि सान्दीपनि राष्ट्रीय वेदविद्या प्रतिष्ठान जैसे देश में 5 और प्रतिष्ठान बनाये जायेंगे : धर्मेन्द्र प्रधान

उज्जैन। केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान (Union Education Minister Dharmendra Pradhan) ने बुधवार को चिन्तामन गणेश रोड स्थित महर्षि सान्दीपनि राष्ट्रीय वेदविद्या प्रतिष्ठान उज्जैन (Maharishi Sandipani National Veda Vidya Pratishthan Ujjain located at Chintaman Ganesh Road) के परिसर में नवनिर्मित यज्ञशाला, ऑडिटोरियम, कम्प्यूटर लेब तथा स्मार्ट कक्षा के भवनों का शुभारम्भ किया। प्रतिष्ठान परिसर में वैदिक परम्परा अनुसार नौ कुण्डीय यज्ञशाला में विधिवत वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन कर शुभारम्भ किया।

केन्द्रीय मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने इस अवसर पर कहा कि महर्षि सान्दीपनि राष्ट्रीय वेदविद्या प्रतिष्ठान के जैसे ही देश में पांच और प्रतिष्ठान बनाये जायेंगे। संस्थान में पढ़ने वाले वैदिक छात्रों को बोर्ड परीक्षा से प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराये जायेंगे। वेदों का देश में व्यापक प्रचार-प्रसार हो, इसका भी प्रयास किया जा रहा है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में विभिन्न विषयों के साथ-साथ वेद का पठन-पाठन भी होगा। इस प्रकार की व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति में की गई है। वेद के ज्ञान को आगे बढ़ाया जायेगा। केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने दिल्ली से आये भारत सरकार के शिक्षा सचिव को निर्देश दिये कि अगले छह माह में संस्थान परिसर में बाहर से आने वाले अतिथियों के लिये विश्राम भवन बनाया जाये।
केन्द्रीय शिक्षा, कौशल विकास, उद्यमिता मंत्री तथा महर्षि सान्दीपनि राष्ट्रीय वेदविद्या प्रतिष्ठान के अध्यक्ष धर्मेन्द्र प्रधान ने नवनिर्मित ऑडिटोरियम सभागार में कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि कई वर्षों के बाद राष्ट्रीय नई शिक्षा नीति 2020 बनाई गई है। हमारे वेद कालजयी हैं। भारत अनमोल देश है। हमारी जिन्दगी में वेदों से भरी पड़ी है। उन्होंने कहा कि भारत के वेद विद्यार्थी उज्जैन के महर्षि सान्दीपनि राष्ट्रीय वेदविद्या प्रतिष्ठान में एक वार्षिक सम्मेलन आयोजित कर चिन्तन-मनन करें। इस के लिए भारत सरकार आर्थिक बजट उपलब्ध करायेगा। संस्थान परिसर में आधुनिक परिसर बनाये जाने का प्रयास किया जायेगा। केन्द्रीय शिक्षा मंत्री ने मप्र सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ.मोहन यादव से कहा है कि परिसर को और व्यापक बढ़ाने के लिये भूमि उपलब्ध कराई जाये। वे इस सम्बन्ध में मप्र शासन के मुख्यमंत्री से भी चर्चा की जायेगी। वेदशाला में वेदों के अध्ययन के लिये बटुकों के अलावा बेटियों को भी वेद को पढ़ाया जाये। कन्या पूजन सौभाग्य होता है।


इस अवसर पर सुरेश सोनी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत को धर्म प्रधान देश कहा जाता है। धर्मों का मूल वेद ही है। विद्या का विकास करना है तो इसमें विवाद न होकर संवाद होना चाहिये। ज्ञान का प्रवाह अनन्त है। सामाजिक जीवन में ज्ञान को समझने के साथ उसे उतारना भी अतिआवश्यक है। संस्थान में सर्वांगीण विकास हो रहा है, वह प्रशंसनीय है। चिन्तन ही महत्वपूर्ण है। भारतीय परम्परा अनुसार काल के अनुसार हमें चलना चाहिये। संस्थान के उपाध्यक्ष प्रफुल्ल कुमार मिश्र ने कहा कि गुरू-शिष्य परम्परा आज भी हमारे देश में जीवंत है। वर्तमान में वेद का पठन-पाठन हो रहा है। हमें इससे आनन्दित महसूस होता है। वेद की रक्षा करना हमारा कर्त्तव्य है। हम आज भी वैदिक सभ्यता में ही जी रहे हैं। सारी विद्याओं का मूल स्रोर्त हमारे वेद ही हैं। वेद का ज्ञान बहुत पुराना है। वैदिक मंत्रों के बार-बार उच्चारण करने से वेद का ज्ञान अवश्य प्राप्त होता है।

केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के साथ मप्र के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ.मोहन यादव आदि अतिथियों ने संस्थान की अन्य गतिविधियों से सम्बन्धित छायाचित्र प्रदर्शनी का अवलोकन किया। साथ ही स्मार्ट क्लास रूम और कम्यूनुटर लेब का अवलोकन किया। कार्यक्रम के पूर्व वैदिक बटुकों ने वैदिक मंगलाचरण के साथ कार्यक्रम की शुरूआत की। स्वागत भाषण संस्था के सचिव ने दिया। इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री डॉ.मोहन यादव, सांसद अनिल फिरोजिया, विधायक पारस जैन, सुरेश सोनी, पूर्व सांसद चिन्तामणि मालवीय, संस्था के उपाध्यक्ष प्रफुल्ल कुमार मिश्र, भारत सरकार के शिक्षा विभाग के सचिव संजीव श्रीवास्तव आदि उपस्थित थे।

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