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Weather Forecast : भारत में इस साल पड़ेगी कड़ाके की ठंड, चलेगी शीतलहर

September 14, 2025

नई दिल्ली। दुनिया के मौसम वैज्ञानिकों (Meteorologists.) ने चेतावनी दी है कि इस साल के अंत तक ला नीना (La Nina) की परिस्थितियां विकसित हो सकती हैं। इसके कारण मौसम का पैटर्न को प्रभावित (Affect weather patterns) होगा और भारत में कड़ाके की ठंड पड़ सकती है। अमेरिका की नेशनल वेदर सर्विस के क्लाइमेट प्रेडिक्शन सेंटर ने 11 सितंबर को कहा कि अक्टूबर-दिसंबर 2025 के बीच ला नीना बनने की 71% संभावना है। यह संभावना दिसंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच थोड़ा घटकर 54% हो जाती है, लेकिन ला नीना वॉच प्रभावी है।


  • ला नीना प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय हिस्से में समुद्र सतह के तापमान के ठंडा होने की स्थिति है। इसका असर पूरी दुनिया के मौसम पर पड़ता है। भारत में यह अक्सर सर्दियों को ज्यादा ठंडा बना देता है।

    IMD ने भी की भविष्यवाणी
    भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने ताजा ENSO बुलेटिन (IMD Cold Wave Forecast 2025-26) में बताया कि अभी तटस्थ स्थितियां बनी हुई हैं। न तो एल नीनो और न ही ला नीना। लेकिन विभाग का मानना है कि मॉनसून के बाद ला नीना की संभावना बढ़ जाएगी। एक वरिष्ठ आईएमडी अधिकारी ने कहा, “हमारे मॉडल अक्टूबर-दिसंबर में ला नीना विकसित होने की 50% से अधिक संभावना दिखा रहे हैं। ला नीना के दौरान भारत में सर्दियां सामान्य से ठंडी होती हैं। हालांकि जलवायु परिवर्तन के कारण गर्माहट कुछ असर कम कर सकती है, लेकिन ठंडी लहरें बढ़ सकती हैं।”

    स्काइमेट ने क्या कहा?
    निजी मौसम संस्था स्काइमेट वेदर के अध्यक्ष जीपी शर्मा ने कहा कि अल्पकालिक ला नीना की स्थिति से इनकार नहीं किया जा सकता है। उन्होंने बताया, “प्रशांत महासागर का तापमान पहले ही सामान्य से ठंडा है। यदि यह -0.5°C से नीचे तीन तिमाहियों तक बना रहता है, तो इसे ला नीना घोषित कर दिया जाएगा। 2024 के अंत में भी ऐसी ही स्थिति बनी थी जब नवंबर से जनवरी तक अल्पकालिक ला नीना रहा।”

    शर्मा के अनुसार, भले ही औपचारिक घोषणा न हो लेकिन प्रशांत महासागर का ठंडा होना वैश्विक मौसम को प्रभावित करेगा। उन्होंने कहा, “अमेरिका में सूखी सर्दियों का खतरा है, जबकि भारत में यह कड़ाके की ठंड और हिमालयी क्षेत्रों में अधिक बर्फबारी ला सकता है।”

    आईआईएसईआर मोहाली और नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस रिसर्च, ब्राजील के 2024 के एक अध्ययन ने भी पाया कि ला नीना वर्षों में उत्तर भारत में ठंडी लहरें अधिक और लंबी अवधि तक चलती हैं। अध्ययन के अनुसार, “ला नीना के दौरान निचले स्तर पर बनने वाली चक्रीय हवाएं उत्तरी अक्षांशों से ठंडी हवा भारत की ओर खींच लाती हैं।”

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