नई दिल्ली। भारत में निपाह वायरस (Nipah Virus) का प्रसार कई एशियाई देशों के लिए चिंता का विषय बन गया है। इस महीने पश्चिम बंगाल में कम से कम 2 लोगों की निपाह वायरस से मौत के बाद थाईलैंड, मलेशिया और सिंगापुर जैसे देशों ने नए परीक्षण उपाय लागू कर दिए हैं। वहीं WHO भी इसे लेकर अलर्ट है। ऐसे में इस वायरस के बारे में जानना और इससे बचाव के तरीकों को समझना बेहद जरूरी है।
निपाह वायरस हेनिपावायरस परिवार का हिस्सा है, जिसमें हींद्रा वायरस भी शामिल है। यह एक जूनोटिक वायरस है, यानी यह जानवरों से इंसानों में फैल सकता है। मानव में इसके संक्रमण से मृत्यु दर 40 से 75 प्रतिशत तक हो सकती है, जिससे यह वायरस अत्यंत घातक माना जाता है।
संक्रमण के तीन तरीके
इसका संक्रमण मुख्य रूप से तीन तरीकों से होता है। पहला तरीका जानवरों से मनुष्यों में संक्रमण है, खासकर चमगादड़ों के संपर्क से। संक्रमित चमगादड़ों की लार, मूत्र या मल के जरिए वायरस फैल सकता है। 1998 में मलेशिया के पहले प्रकोप में सूअरों से संक्रमण फैला था। दूसरा तरीका संक्रमित भोजन के जरिए है, विशेषकर खजूर के पेड़ (डेट पाम) से बने उन उत्पादों के सेवन से जो संक्रमित हों। यदि चमगादड़ों की लार, मूत्र या मल से ये उत्पाद संक्रमित हो जाएं तो वायरस फैल सकता है।
क्या होते हैं लक्षण?
संक्रमण के चार दिन से तीन सप्ताह के भीतर लक्षण सामने आ सकते हैं। निपाह वायरस का संक्रमण बहुत गंभीर हो सकता है, विशेषकर जब यह दिमाग में सूजन (एन्सेफलाइटिस) पैदा करता है। इसके कारण मृत्यु दर बहुत अधिक होती है। इस वायरस के संक्रमण के आम लक्षणों में बुखार, तेज सिरदर्द, दौरे, सांस लेने में कठिनाई, बेहोशी, किसी अंग को हिलाने में असमर्थता, झटके या असामान्य मांसपेशी गतिविधियां और अचानक व्यवहार में बदलाव शामिल हैं। कुछ मरीज जो प्रारंभिक संक्रमण से बच जाते हैं, उनमें सालों बाद भी पुनः एन्सेफलाइटिस विकसित हो सकता है।
कोई टीका या इलाज नहीं
अभी तक निपाह वायरस के लिए कोई स्वीकृत इलाज या टीका उपलब्ध नहीं है। ऑस्ट्रेलिया में एम102.4 नामक संभावित उपचार विकसित किया जा रहा है। 2020 में इसके प्रथम चरण के परीक्षण के तहत स्वस्थ लोगों को यह टीका दिया गया ताकि यह देखा जा सके कि यह सुरक्षित है या नहीं। प्रारंभिक अध्ययन में यह एक खुराक में सुरक्षित पाया गया। हालांकि यह अभी तक व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं है और भविष्य में इसे न केवल उपचार के रूप में बल्कि संभावित टीके के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
कितना खतरा?
विशेषज्ञों का कहना है कि निपाह वायरस का मानव-से-मानव प्रसारण सीमित है, इसलिए यह कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी का रूप लेने की आशंका नहीं रखता। मुख्य संक्रमण के स्रोत जानवर और संक्रमित भोजन हैं। प्रभावित क्षेत्रों से बाहर रहने वालों के लिए जोखिम कम है। प्रभावित क्षेत्रों में भी मामले कम हैं, लेकिन स्वास्थ्य अधिकारियों ने नियंत्रण और निगरानी के कड़े उपाय लागू किए हैं। फिर भी निपाह वायरस एक गंभीर और जानलेवा वायरस है। इसकी उच्च मृत्यु दर और दिमाग पर असर इसे खतरनाक बनाते हैं।
कैसे करें बचाव?
हालांकि वैश्विक स्तर पर इसका प्रसार फिलहाल सीमित है, लेकिन प्रभावित देशों में सतर्कता और निगरानी बेहद महत्वपूर्ण हैं। यात्रियों को प्रभावित क्षेत्रों में जाने के बाद लक्षण प्रकट होने पर डॉक्टर को अपनी यात्रा की जानकारी देना चाहिए। निपाह वायरस की गंभीरता को नजरअंदाज नहीं किया जा जाना चाहिए। इसका नियंत्रण जानवरों, संक्रमित भोजन और संक्रमित व्यक्तियों के संपर्क से बचाव के माध्यम से ही संभव है।
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