
उज्जैन। शहर में बर्फ की 5 से अधिक फेक्ट्रियाँ हैं लेकिन यहाँ पर सही मानकों का पालन नहीं किया जाता तथा खाद्य विभाग भी जाँच नहीं करता। कई जगह तो दूषित पानी से ही कच्चा बर्फ तैयार कर दिया जाता है।
उल्लेखनीय है कि शहर में जूस सेंटरों में धड़ल्ले से अमानक बर्फ बेची जा रही है। इसके अलावा शादी और पार्टियों में भी इसका जमकर उपयोग हो रहा है।बर्फ फैक्ट्रियों से मार्केट में आने वाली सिल्लियां का उपयोग पेय पदार्थों में धड़ल्ले से किया जा रहा है। लेकिन सिल्ली वाले बर्फ की जांच कोई नहीं कर रहा। इसके सेवन से कै बीमारियां हो रही हैं। वहीं जल जनित बीमारियों को लेकर स्वास्थ्य विभाग से लेकर फूड अधिकारी कितने गंभीर है। बता दें कि बर्फ फैक्ट्री संचालक स्थानीय निकाय से फैक्ट्री संचालन की स्वीकृति लेकर बर्फ बनाते हैं। जिलेभर में करीब कई फैक्ट्रियां चल रही है। लेकिन खाद्य बर्फ बनाने का लाइसेंस किस किस के पास है इसका सही आंकड़ा भी विभाग के पास नहीं हैं।
पीएचई की लैबोरेटरी में जाँच जरूरी
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिस पानी से खाद्य बर्फ बनाई जानी है। उस फैक्ट्री के मालिक को पानी की जाँच पीएचई लैबोरेटरी में करानी होती है। उसके बाद खाद्य औषधि प्रशासन विभाग निरीक्षण करेगा। सभी व्यवस्था दुरुस्त होने के बाद ही लाइसेंस जारी किया जाता है, लेकिन उज्जैन में जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण बर्फ निर्माता लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं।
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