
उज्जैन। शहर सहित प्रदेश की जेलों को भी धीरे-धीरे हाईटेक किया जा रहा है। कैदियों की संख्या बढऩे के साथ नई जेलों का निर्माण भी हो रहा है। दूसरी तरफ सुरक्षा व्यवस्था भी पुख्ता की जा रही है। यहाँ तक कि अब वीडियो कान्फ्रेंस के जरिए ही कैदियों की पेशी अदालतों में करवाने की भी प्रक्रिया शुरू की गई है।
उल्लेखनीय है कि जेल ब्रेक की कुछ घटनाएं प्रदेश में होती रही हैं। कई वर्ष पूर्व उज्जैन भैरवगढ़ जेल से कैदी फरार हुए थे। भोपाल की सेंट्रल जेल से सिमी के 8 कैदी हेड कॉन्स्टेबल की हत्या कर जेल से फरार हो गए थे। उसके बाद से ही सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करने के कई उपाय किए गए, जिसमें अब इलेक्ट्रिक फेंसिंग भी जेल की बाउण्ड्रीवॉल पर की जा रही है। 18 करोड़ रुपए की राशि जेल विभाग इस पर खर्च कर रहा है, जिसमें प्रदेश की सभी 123 जेलों में यह फेंसिंग लगेगी। उज्जैन सहित प्रदेश की 14 जेलों में इसका प्रयोग शुरू भी कर दिया है। इसमें दीवार फांदकर भागने वाले कैदियों को करंट लगेगा और अलार्म सिस्टम भी एक्टिव हो जाएगा। बता दें कि अब सभी 123 जेलों में इलेक्ट्रिक फेंसिंग करवाई जा रही है। उज्जैन, इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, सागर, सतना सहित 14 जेलों में यह इलेक्ट्रिक फेंसिंग हो भी गई है। शेष 123 जेलों में भी यह सिस्टम शुरू हो जाएगा। वर्तमान में प्रदेश की सभी जेलों में 42 हजार से अधिक कैदी बंद हैं। उज्जैन में ही सेंट्रल भैरवगढ़ जेल लबालब भरी है, संभवत: पूरे देश में इस तरह का पहला प्रयोग हो रहा है, जब प्रदेश की सभी जेलों को सुरक्षित किया जा रहा है। इससे दीवार फांदकर कैदियों का फरार होना बंद हो जाएगा। जेल डीजी वरुण कपूर खुद इस मामले में को देख रहे हैं और उनके निर्देशन में ही उज्जैन सहित सभी जेलों में इलेक्ट्रिक तार फेंसिंग लगाने का काम किया जा रहा है। जिन 14 जेलों में यह प्रयोग किया गया, वहां इसे सफल और कारगर भी बताया गया। जेल विभाग का कहना है कि यह फेंसिंग इस तरह लगाई गई है कि बाउण्ड्रीवॉल कूदने-फांदने या उसे नुकसान पहुंचाने पर हल्का झटका कैदी को लगेगा, साथ ही अलार्म सिस्टम भी सक्रिय हो जाएगा, जिससे जेल प्रहरी सतर्क हो जाएंगे और जेल ब्रेक की घटनाएं समाप्त हो जाएंगी।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved