
इंदौर। नेशनल हाईवे द्वारा इंदौर बायपास पर जो फ्लायओवर बनवाए जा रहे हैं उससे अगले कुछ महीनों में यातायात जाम की समस्या से काफी हद तक राहत मिल जाएगी, जिनमें से दो फ्लायओवर तो अभी शुरू हो रहे हैं। अर्जुन बड़ौद आज और फिर कल रालामण्डल से भी यातायात शुरू हो जाएगा। एमआर-10 जंक्शन पर बन रहे फ्लायओवर और अंडरग्राउंड में अवश्य अभी थोड़ा समय लगेगा। 200 करोड़ रुपए से अधिक लागत से ये तीनों फ्लायओवर निर्मित किए जा रहे हैं।
एमआर-4 का निर्माण लगभग अंतिम चरण की ओर
इंदौर बायपास पर ही आए दिन नागरिकों को भुगतना पड़ता है। संकरे बोगदों और अभी चल रहे निर्माणों के चलते काफी समस्या होती है। बोगदों की समस्या दूर करने के लिए ही फ्लायओवर निर्मित किए गए हैं, जिनमें अभी अर्जुन बड़ौद फ्लायओवर पर ट्रायल भी शुरू हो गया है, जिससे इंदौर से देवास और उसके साथ उज्जैन जाना भी आसान हो जाएगा, क्योंकि शिप्रा ब्रिज के पास से उज्जैन के लिए जो फोरलेन बना है उसमें सबसे ज्यादा यातायात जाम अभी अर्जुन बड़ौद फ्लायओवर के कारण ही लगता रहा है।
अब इंदौर से देवास का सफर भी आसान होगा और 15 से 20 मिनट बचेंगे। वहीं रालामंडल ब्रिज तैयार तो हो गया था, मगर कुछ टूट-फूट के बाद उसकी मरम्मत की गई और कल से उस पर से भी यातायात गुजरने लगेगा। इन दोनों फ्लायओवरों से ही अभी काफी राहत मिलेगी और सबसे बड़ी वाहन चालकों को राहत एमआर-10 जंक्शन पर बन रहे फ्लायओवर के होने पर और भी मिल जाएगी, क्योंकि अभी निपानिया-झलारिया पर सबसे अधिक यातायात का दबाव रहता है और इनके बोगदों में जाम लगा रहता है।
इस फ्लायओवर और अंडरपास का निर्माण भी अंतिम चरण में है और जून अंत तक इस पर से भी यातायात शुरू करने की अनुमति नेशनल हाईवे ने दी है। इसके अलावा एक और महत्वपूर्ण जानकारी इंदौर से गुजर रहे आगरा-मुंबई हाईवे को लेकर सामने आई, जिसमें इसे फोरलेन से सिक्स लेन में परिवर्तित किया जा रहा है। 160 किलोमीटर का जो हिस्सा इंदौर से खलघाट, सेंधवा होते हुए महाराष्ट्र सीमा तक अभी बना है वहीं, पर सबसे अधिक यातायात जाम और भेरूघाट, बाकानेर घाट, बिजासन घाट सहित अन्य पाहड़ी रास्ते आते हैं, जिस पर कई भीषण दुर्घटनाएं हो चुकी है। नेशनल हाईवे का कहना है कि वह सिक्स लेन बनाने की डीपीआर तैयार कर रहा है, जिसे मंजूरी के लिए दिल्ली केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय भेजा जाएगा। दूसरी तरफ खलघाट में भी नर्मदा नदी पर एक बड़ा समानांतर पुल बनाने का भी प्रस्ताव है, क्योंकि मौजूदा पुल पर भी यातायात का अत्यधिक दबाव रहता है। यह पूरा फोरलेन अगर सिक्सलेन में परिवर्तित होता है तो इंदौर से मुंबई की यात्रा भी आसान हो जाएगी।
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