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 इंदौर: भंडारी मिल प्रसूति गृह के विवादित भूखंड पर शुरू हुए निर्माण कार्य को नगर निगम ने रूकवाया, पचोरवाला बिल्डर को थमाया नोटिस

June 03, 2026

अग्रिबाण भंडाफोड़ (पार्ट-3)… तथ्यात्मक खबरों के प्रकाशन बाद प्राधिकरण और निगम ने शुरू की कार्रवाई, भवन अधिकारी ने सुनवाई के बाद काम रोकने के दिए निर्देश, लिखित में भी मांगा जवाब

– १५० करोड़ के भूखंड पर मनमानी बिल्डिंगें तानने के किए प्रयास
– सुनवाई का समय बढ़वाया, मगर निगम से नहीं मिल सकी राहत
– प्राधिकरण सीईओ के पत्र के आधार पर निगमायुक्त ने शुरू करवाई जांच
– झोन-३ की भवन अधिकारी पल्लवी पाल ने की नोटिस पर सुनवाई
– स्नेहलतागंज मेनरोड पर मौजूद भूखंड पर शुरू हुआ था निर्माण कार्य
– प्राधिकरण की बिना एनओसी के कामनहीं कर पाएगा बिल्डर

 इंदौर, राजेश ज्वेल
अग्रिबाण (agriban) द्वारा तथ्यात्मक खबरों के प्रकाशन और 150 करोड़ के भूखंड (Plots worth ₹150 crore) पर मनमाने निर्माण करने का मामला उजागर करने के बाद पहले प्राधिकरण (authority), उसके बाद नगर निगम (Municipal council) ने भी कार्रवाई शुरू की और कल झोन क्रमांक-3, वार्ड 57 के अंतर्गत स्नेहलतागंज मैन रोड पर योजना 99 के विवादित भूखंड पर शुरू हुए निर्माण कार्य को निगम की भवन अधिकारी ने रूकवा दिया। इसके पूर्व आयुक्त क्षितिज सिंघल के निर्देश पर भवन अधिकारी पल्लवी पाल ने पचोरवाला बिल्डर्स एंड डवलपर्स प्रा.लि. तर्फे डायरेक्टर देवेन्द्र दौलतचंद्र सेठी को नोटिस थमाया और उस पर जवाब मांगा। पहले तो 25 मई को इस नोटिस पर सुनवाई होना थी, जिस पर बिल्डर ने समय मांगा और फिर कल 2 जून को भवन अधिकारी ने सुनवाई करते हुए बिल्डर को तुरंत ही काम बंद करने और इस आशय का लिखित में शपथ-पत्र देने के अलावा यह भी निर्देश दिए कि जब तक प्राधिकरण से एनओसी प्राप्त नहीं हो जाती, तब तक मौके पर किसी तरह का निर्माण कार्य नहीं किया जाए अन्यथा निगम रिमूव्हल सहित अन्य कड़ी कार्रवाई करेगा।


  • पहले तो इंदौर विकास प्राधिकरण के तत्कालीन अधिकारियों ने पचोरवाला बिल्डर के साथ सांठगांठ कर लगभग 60 हजार स्क्वेयर फीट के भूखंड को कौडिय़ों के भाव दे डाला, जबकि वर्तमान कीमत 150 करोड़ रुपए से अधिक है। यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट आदेश को भी धता बताकर मेटरनिटी होम यानी प्रसूति गृह की जमीन पर अवैध रूप से आवासीय ब्लॉक निर्माण की मंजूरी दे डाली। कुछ वर्ष पूर्व भी अग्रिबाण ने इस पूरे भू-घोटाले को उजागर किया, उसके बाद प्राधिकरण में मौजूद रिकार्ड गायब करवा दिए गए, जबकि शासन के आवास एवं पर्यावरण विभाग ने भी शर्तों के साथ जो अनुमति दी, उसमें भी प्रसूति गृह के निर्माण का ही प्रावधान किया गया था। 1992 में टेंडर के जरिए उक्त भूखंड को बेचने का निर्णय लिया और फिर एक वास्तुविद और प्राधिकरण की प्लानिंग शाखा के बीच हुई सांठगांठ में 1994 में नया टेंडर बना, जिसमें चार आवासीय ब्लॉकों के साथ सिर्फ एक हिस्सा प्रसूति गृह के लिए रखा और बाद में उसे भी गायब कर आवासीय और वाणिज्यिक कॉम्प्लेक्स की अनुमति लेने के नाकाम प्रयास किए जाते रहे और फिर संशोधित मानचित्र में हेरा-फेरी कर अन्य प्रावधान भी हटा डाले। पचोरवाला बिल्डर्स एंड डवलपर्स पर मेहरबान रहे प्राधिकरण के अधिकारियों ने लीज शर्तों के उल्लंघन के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की और ना ही नए सिरे से टेंडर बुलाने का निर्णय लिया। यहां तक कि 13 साल तक भुगतान ना करने के बावजूद प्राधिकरण सोया रहा और आबंटन के 23 साल बाद रजिस्ट्री करवाते हुए लीज अवधि में भी हेरा-फेरी कर दी। 1994 में आवंटित भूखंड की 30 साल की लीज अवधि 2007 से शुरू होना बताई गई, जबकि यह अवधि 1994 से 30 वर्ष यानी 2024 में समाप्त हो चुकी है। हालांकि प्राधिकरण के नए व्ययन नियम में बिल्डर फंस गया था, जिसके तहत लीज अवधि के 10 साल तक निर्माण कार्य नहीं करने पर प्राधिकरण भूखंड की लीज समाप्त कर सकता है।

    नए सीईओ डॉ. परीक्षित झाड़े ने तत्परता दिखाई और निगमायुक्त ने निर्माण रुकवाया
    अग्रिबाण ने जब इस पूरे मामले को प्राधिकरण सीईओ डॉ. परीक्षित झाड़े के संज्ञान में लाया, तो उन्होंने तत्परता से इस मामले को संज्ञान में लिया और उतनी ही गंभीरता से निगमायुक्त क्षितिज सिंघल को भी पत्र लिखकर निगम द्वारा दी गई भवन अनुज्ञा की जांच करने और मौके पर चल रहे निर्माण को रूकवाने का अनुरोध किया। उधर, निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने भी प्राधिकरण के इस पत्र के आधार पर भवन अधिकारी के माध्यम से नोटिस जारी करवाया, जिसमें झोन-3 की भवन अधिकारी पल्लवी पाल ने तत्काल निर्माण कार्य रोककर मेसर्स पचोरवाला बिल्डर्स एवं डवलपर्स से उनका स्पष्टीकरण मांगा, जिस पर कल भवन अधिकारी ने सुनवाई की प्रक्रिया की और स्पष्ट निर्देश दिए कि तत्काल प्रभाव से निर्माण कार्य रोका जाए और जब तक इंदौर विकास प्राधिकरण से एनओसी प्राप्त नहीं कर ली जाती, तब तक कोई निर्माण ना किया जाए। दरअसल, प्राधिकरण सीईओ ने अपने पत्र में व्ययन नियम 2018 के संशोधित नियम 23 (2) का भी इस मामले में स्पष्ट उल्लंघन माना और लीज शर्तों के उल्लंघन के चलते प्राधिकरण भी लीज निरस्ती सहित अन्य कार्रवाई करेगा, जिसके चलते भवन अधिकारी ने अपने नोटिस में भी इसका उल्लेख करते हुए मौके पर चल रहे अनुचित निर्माण कार्य को रूकवा दिया। दूसरी तरफ प्राधिकरण सीईओ डॉ. $झाड़े ने भी इस पूरे भू-घोटाले से जुड़े दस्तावेजों की जांच-पड़ताल शुरू कर दी और विधि विभाग की भी राय ली जा रही है।

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