
पानी की समस्या से निपटने के लिए 50 करोड़ तो नहीं दिए और चुंगी क्षतिपूर्ति के 30 करोड़ काट लिए
इंदौर। राज्य सरकार (State government) द्वारा एक बार फिर इंदौर नगर निगम (Indore Municipal Corporation) को जोरदार झटका (blow) दिया गया है। नगर निगम की ओर से शहर में मौजूद पानी के संकट (water hazard) से निपटने के लिए 50 करोड़ रुपए की मांग की गई थी। सरकार ने यह राशि तो नहीं दी, बल्कि चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि में से और 30 करोड़ रुपए काट लिए।
इस समय इंदौर पानी के गंभीर संकट से जूझ रहा है। इस संकट को लेकर शहर में जब हल्ला मच गया तो राज्य सरकार द्वारा अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन को इंदौर में हालात की समीक्षा करने के लिए भेजा गया था। उनके द्वारा अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की संयुक्त बैठक ली गई थी। इस बैठक में महापौर पुष्यमित्र भार्गव द्वारा पानी के संकट से निपटने के लिए इंदौर नगर निगम को एकमुश्त 50 करोड़ की राशि देने की मांग की गई थी। इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा भी इंदौर में पानी के संकट की स्थिति की समीक्षा बैठक ली गई थी। इस बैठक में भी महापौर की ओर से यह मांग दोहराई गई थी। इस पर मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया था कि पैसे की कोई कमी नहीं है। महापौर द्वारा यह मांग किए जाने के बावजूद राज्य सरकार द्वारा पानी के संकट से निपटने के लिए अब तक इंदौर नगर निगम को एक रुपया भी नहीं दिया गया है। हर महीने राज्य सरकार की ओर से चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि नगर निगम को प्राप्त होती है। इस महीने की भी यह राशि मिल गई है। नगर निगम का हर महीने का चुंगी क्षतिपूर्ति का 45 करोड़ रुपए बनता है। सरकार द्वारा इसमें से नर्मदा परियोजना के बिजली बिल की राशि काटकर शेष राशि निगम को दी जाती है। यह सिलसिला इस महीने भी सरकार द्वारा कायम रखा गया और नगर निगम को मात्र 15 करोड़ रुपए मिल सके हैं। इस तरह सरकार की ओर से इस महीने चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि में भी 30 करोड़ रुपए काट लिए गए हैं।
करोड़ों रुपए हैं बकाया
नगर निगम को किराए पर लिए गए टैंकर और बोरिंग की मोटर सुधरवाने के करोड़ों रुपए ठेकेदारों को चुकाना हैं। निगम को उम्मीद थी कि राज्य सरकार से 50 करोड़ की राशि प्राप्त हो जाएगी तो इन ठेकेदारों को बकाया राशि के एवज में कुछ भुगतान जारी कर दिया जाएगा। नगर निगम की माली हालत अभी ऐसी नहीं है कि वह अपने पास से ठेकेदारों को भुगतान जारी कर सके। ऐसे में अब राज्य सरकार से भी पैसा नहीं आने से निगम के लिए हालात संभालना चुनौतीपूर्ण हो गया है।