श्रीनगर। देश के बुनियादी ढांचा विकास के इतिहास में मंगलवार का दिन एक अहम पड़ाव साबित होने जा रहा है। कश्मीर और लद्दाख (Kashmir and Ladakh) को हर मौसम में जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित जोजिला सुरंग परियोजना (Zozilla Tunnel Project) में आज ब्रेकथ्रू ब्लास्ट (Breakthrough Blast) किया जाएगा। इस महत्वपूर्ण चरण के पूरा होने के साथ ही दुनिया की सबसे ऊंचाई पर स्थित और सबसे लंबी सिंगल-ट्यूब द्वि-दिशात्मक सुरंग का निर्माण अगले चरण में प्रवेश करेगा।
इस ऐतिहासिक मौके के साक्षी केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी बनेंगे। वे परियोजना स्थल पर पहुंचकर निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा भी करेंगे। अधिकारियों का कहना है कि यह सुरंग लद्दाख को सालभर देश के बाकी हिस्सों से जोड़े रखने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। खासकर सर्दियों में भारी बर्फबारी के दौरान जब जोजिला दर्रा बंद हो जाता है, तब यह सुरंग जीवनरेखा का काम करेगी।
अधिकारियों के मुताबिक, सुरंग को जनवरी-फरवरी 2028 तक आम लोगों के लिए खोले जाने का लक्ष्य रखा गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (NHIDCL) के अधिकारियों का कहना है कि ब्रेकथ्रू तय समय से करीब छह महीने पहले हो रहा है, जो परियोजना के लिहाज से बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। इसके बाद अगले सात से आठ महीनों तक सिविल कार्य जारी रहेगा, जबकि बाद में बिजली और अन्य तकनीकी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जाएगा।
जोजिला सुरंग की खास बातें
15 मिनट में पूरा होगा कठिन सफर
सुरंग के शुरू होने के बाद जोजिला दर्रे से गुजरने में लगने वाला एक से डेढ़ घंटे का सफर घटकर महज 15 मिनट रह जाएगा। यह परियोजना श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर सालभर आवाजाही सुनिश्चित करेगी। सुरंग कश्मीर के गांदरबल जिले के बालटाल क्षेत्र को लद्दाख के द्रास जिले के मिनीमार्ग से जोड़ेगी। वर्तमान में भारी बर्फबारी के कारण यह मार्ग हर साल कई महीनों तक बंद रहता है।
31 किलोमीटर लंबी पूरी परियोजना
जोजिला सुरंग परियोजना की कुल लंबाई 31 किलोमीटर है, जिसमें लगभग 18 किलोमीटर लंबी एप्रोच सड़कें और पुल शामिल हैं। मुख्य सुरंग हिमालय की कठिन चट्टानी संरचनाओं को काटकर तैयार की जा रही है, जिसे इंजीनियरिंग का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।
अत्याधुनिक तकनीक से हो रहा निर्माण
इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निर्माण मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (MEIL) द्वारा किया जा रहा है। सुरंग को न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (NATM) के जरिए विकसित किया जा रहा है। इसमें आधुनिक वेंटिलेशन सिस्टम, सीसीटीवी निगरानी, रेडियो संचार, निर्बाध बिजली आपूर्ति और स्मार्ट टनल प्रबंधन प्रणाली जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
सामरिक और आर्थिक रूप से अहम परियोजना
जोजिला सुरंग को सामरिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके शुरू होने से सीमावर्ती इलाकों में सेना की त्वरित तैनाती और रसद आपूर्ति आसान हो सकेगी। साथ ही पर्यटन, व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। स्थानीय लोगों का मानना है कि सालभर कनेक्टिविटी मिलने से वस्तुओं के आवागमन में तेजी आएगी और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
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