नई दिल्ली। राज्यसभा (Rajya Sabha) में हालिया चुनावों के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की स्थिति और मजबूत होती दिखाई दे रही है। बिना किसी अतिरिक्त चुनाव के गठबंधन को अब मिजोरम से भी समर्थन मिलने का संकेत मिला है। राज्यसभा सांसद लालतलुआंगकिमा ने स्पष्ट किया है कि वे संसद में स्वतंत्र और तटस्थ भूमिका निभाएंगे, लेकिन राज्य के हित और विकास से जुड़े मुद्दों पर केंद्र की भाजपा नेतृत्व वाली सरकार का साथ देंगे।
समर्थन सशर्त, राज्यहित रहेगा प्राथमिकता
सत्तारूढ़ जोरम पीपुल्स मूवमेंट (ZPM) के नेता लालतलुआंगकिमा ने कहा कि उनकी प्राथमिकता मिजोरम के लोगों का कल्याण और राज्य का विकास है। उन्होंने कहा कि संसद में उनका रुख किसी गठबंधन का हिस्सा बनने का नहीं होगा, बल्कि हर मुद्दे पर अलग-अलग निर्णय लिया जाएगा। यदि केंद्र सरकार राज्य के हितों से जुड़े प्रस्ताव लाती है तो उनका समर्थन किया जाएगा।
गौरतलब है कि ZPM वर्ष 2017 में बनी एक क्षेत्रीय पार्टी है और फिलहाल न तो NDA का हिस्सा है और न ही विपक्षी INDIA गठबंधन से जुड़ी है।
राज्यसभा चुनाव में लालतलुआंगकिमा ने कुल 36 वैध मतों में से 26 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। उन्होंने मिजो नेशनल फ्रंट (MNF) की उम्मीदवार जोथानसांगी ह्मार को हराया, जिन्हें उनकी पार्टी के 10 विधायकों का समर्थन मिला।
उन्होंने यह भी बताया कि पार्टी के लोकसभा सांसद रिचर्ड वानलालहमंगाइहा भी संसद में तटस्थ रुख अपनाएंगे और मुद्दों के आधार पर ही सरकार का समर्थन करेंगे।
तीन विधायक मतदान से रहे दूर
राज्यसभा चुनाव के दौरान तीन विधायक मतदान में शामिल नहीं हुए। इनमें भाजपा के दो विधायक के. बेइचहुआ और के. हराहमो तथा कांग्रेस के एकमात्र विधायक सी. न्गुनलिआनचुंगा शामिल थे। इसके अलावा विधायक डब्ल्यू. छुआनावमा स्वास्थ्य कारणों से मतदान नहीं कर सके।
40 सदस्यीय मिजोरम विधानसभा में फिलहाल ZPM के 27, MNF के 10, भाजपा के 2 और कांग्रेस का 1 विधायक है।
राज्यसभा में NDA का बढ़ा आंकड़ा
हाल ही में 27 राज्यसभा सीटों पर हुए चुनाव में NDA ने 19 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इसके बाद 245 सदस्यीय राज्यसभा में गठबंधन की संख्या 152 तक पहुंच गई थी। अब लालतलुआंगकिमा के समर्थन के बाद यह आंकड़ा बढ़कर 153 माना जा रहा है।
राज्यसभा में बहुमत के लिए 164 सदस्यों का समर्थन आवश्यक है। इसी बीच तृणमूल कांग्रेस के चार सांसदों के इस्तीफे के बाद खाली हुई सीटों पर भी भाजपा की संभावित बढ़त को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं।
मॉनसून सत्र पर टिकी निगाहें
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि आने वाले समय में NDA राज्यसभा में और संख्या जुटाने में सफल रहता है, तो सरकार संविधान संशोधन से जुड़े लंबित विधेयकों को फिर से आगे बढ़ा सकती है।
इससे पहले केंद्र सरकार परिसीमन से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक लेकर आई थी, लेकिन राज्यसभा में आवश्यक दो-तिहाई समर्थन नहीं मिलने के कारण उसे पारित नहीं कराया जा सका था। ऐसे में आगामी मॉनसून सत्र के दौरान उच्च सदन की बदली हुई संख्या पर सभी दलों की नजर रहेगी।
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