
भोपाल: देशभर में परीक्षा पेपर लीक (Exam Paper Leak) के मुद्दे पर बवाल मचा हुआ है. दिल्ली समेत कई राज्यों में छात्र (Student) सड़कों पर उतर विरोध-प्रदर्शन (Protests) कर रहे रहे हैं. इस बीच मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) हाईकोर्ट (High Court) ने प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक और उनसे जुड़ी अनियमितताओं के मामलों की सुनवाई के लिए चार फास्ट ट्रैक (Four Fast Tracks) कोर्ट गठित किए हैं. कोर्ट ने निर्देश दिया है कि आरोपपत्र दाखिल होने की तारीख से तीन महीने के अंदर इन मामलों का निपटारा करने का मुमकिन कोशिश की जाए.
जानकारी के मुताबिक यह फैसला परीक्षा में गड़बड़ियों, विशेषकर राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट-यूजी) से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए केंद्र सरकार द्वारा त्वरित अदालत गठित करने का आश्वासन दिए जाने के दो दिन बाद आया है.
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया ने शुक्रवार (24 जुलाई) को भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में एक-एक जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायालय को विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के रूप में नामित किया है. ये अदालतें लोक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम, 2024 के तहत दर्ज मामलों के साथ-साथ इससे जुड़े अन्य अपराधों की भी सुनवाई करेंगी.
इससे एक दिन पहले मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में प्रश्नपत्र लीक के मामलों की त्वरित सुनवाई, शीघ्र न्याय और दोषियों को कड़ी सजा सुनिश्चित करने के लिए विशेष त्वरित अदालत स्थापित किए जाने की घोषणा की थी. ताकि पेपर लीक से जुड़े मामलों में त्वरित सुनवाई सुनिश्चित की जा सके और दोषी पाए जाने वालों को कड़ी सजा दी जा सके.
सरकारी बयान के मुताबिक भोपाल के 18वें जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण पटेल को विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट की जिम्मेदारी दी गई है. वहीं ग्वालियर में 8वें जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विशाल अखंड, जबलपुर में 27वें जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आनंद कुमार सेहलम और इंदौर में 26वें जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डॉ. शुभ्रा सिंह को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है. बयान में कहा गया है कि इस पहल का मकसद लोक परीक्षाओं की शुचिता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखना एवं ऐसे मामलों का त्वरित और प्रभावी न्यायिक निपटारा सुनिश्चित करना है.
विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 के तहत दंडनीय अपराधों के अलावा ऐसे मामलों से संबंधित भारतीय न्याय संहिता, 2023 के प्रावधानों के अंतर्गत आने वाले मामलों एवं राज्य या केंद्र सरकार द्वारा संदर्भित और संबंधित जांच एजेंसियों द्वारा जांच किए गए अन्य मामलों की भी सुनवाई करेंगे. बयान में कहा गया है कि प्रत्येक विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट का अधिकार क्षेत्र उसके मुख्यालय से संबद्ध निर्धारित जिलों तक होगा. इससे इन चार न्यायालयों के माध्यम से पूरे प्रदेश में प्रभावी न्यायिक व्यवस्था सुनिश्चित की जा सकेगी.
हाईकोर्ट ने संबंधित प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को यह भी निर्देश दिया है कि नामित विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट आरोपपत्र दाखिल होने की तिथि से तीन महीने के भीतर सुनवाई पूरी कर निर्णय सुनाने का हरसंभव प्रयास करें. बयान के मुताबिक इन विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना से सार्वजनिक परीक्षाओं से जुड़े अपराधों के मामलों में अभियोजन प्रक्रिया में तेजी आएगी और जल्द न्याय सुनिश्चित होने की उम्मीद है.
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