नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया (Indonesia) की संसद को संबोधित करते हुए भारत और इंडोनेशिया (Indonesia) के ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख किया और ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री एवं प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी बीजू पटनायक (Biju Patnaik) के योगदान को विशेष रूप से याद किया। उन्होंने कहा कि इंडोनेशिया के स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान बीजू पटनायक ने जो साहसिक भूमिका निभाई, उसने दोनों देशों के रिश्तों को नई मजबूती दी।
इंडोनेशिया ने वर्ष 1945 में स्वतंत्रता की घोषणा की थी, जबकि भारत 1947 में आजाद हुआ। उस दौर में भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इंडोनेशिया की स्वतंत्रता का खुलकर समर्थन किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र समेत विभिन्न वैश्विक मंचों पर भारत ने इंडोनेशिया के पक्ष में आवाज उठाई और दोनों देशों के बीच भरोसे की मजबूत नींव रखी।
ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, 1947 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के अनुरोध पर बीजू पटनायक ने एक अत्यंत जोखिम भरे गुप्त अभियान को अंजाम दिया। उस समय डच सेना ने इंडोनेशिया के प्रधानमंत्री सुतन सजारिर और उपराष्ट्रपति मोहम्मद हट्टा को नजरबंद कर रखा था। उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने की जिम्मेदारी बीजू पटनायक को सौंपी गई।
बीजू पटनायक ने अपनी सह-पायलट और पत्नी ज्ञानवती पटनायक के साथ डगलस C-47 डकोटा विमान उड़ाकर इंडोनेशिया के हवाई क्षेत्र में प्रवेश किया। मिशन के दौरान विमान को मार गिराने की चेतावनी भी मिली, लेकिन उन्होंने जोखिम उठाते हुए अभियान जारी रखा। अंततः दोनों इंडोनेशियाई नेताओं को सुरक्षित बाहर निकालकर पहले सिंगापुर और बाद में 24 जुलाई 1947 को नई दिल्ली पहुंचाया गया। इस अभियान ने इंडोनेशिया के स्वतंत्रता आंदोलन की ओर पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित किया।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर को भी याद किया। उन्होंने कहा कि भारत और इंडोनेशिया टैगोर की इंडोनेशिया यात्रा की 100वीं वर्षगांठ संयुक्त रूप से मनाएंगे। उन्होंने इंडोनेशिया के पहले शिक्षा मंत्री की हजर देवान्तारा का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी शिक्षा संबंधी सोच पर टैगोर के विचारों का गहरा प्रभाव था। इसी साझा विरासत को सम्मान देने के लिए दोनों देश इस अवसर को सांस्कृतिक और शैक्षिक सहयोग के विशेष वर्ष के रूप में मनाएंगे।
प्रधानमंत्री मोदी का इंडोनेशिया दौरा उनकी तीन देशों की यात्रा का पहला चरण है। इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, समुद्री सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत बनाने पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने वैश्विक मुद्दों पर संवाद और कूटनीति की आवश्यकता दोहराते हुए फिलिस्तीन के संदर्भ में भारत की द्वि-राष्ट्र समाधान की नीति का भी समर्थन दोहराया।
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