मध्‍यप्रदेश

होशंगाबाद डूबा, मप्र में नहीं होगी पानी की किल्लत, बड़े 75, छोटे डेम 60% भरे


छत्तीसगढ़ के साथ मध्यप्रदेश में भी आफत बनी बारिश
बुधवार।  बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) में बने नए मानसूनी सिस्टम (Monsoon System) से मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ (Madhya Pradesh-Chhattisgarh) तरबतर हैं। मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) और छत्तीसगढ़ के कई जिलों में भारी बारिश ( heavy rains) अब आफत बन गई है। भोपाल (Bhopal), इंदौर (Indore), होशंगाबाद, कटनी, विदिशा, मुंगेली, रायपुर, कांकेर, बस्तर, बेमेतरा, धमतरी, बालोद सहित कई जगहों पर लोग बाढ़ से बेहाल हैं। जनजीवन अस्त-व्यस्त है। दोनों राज्यों के नदी-नाले उफान पर हैं। कई जगहों पर घरों में 4 से 5 फीट तक पानी भर गया। होशंगाबाद (Hoshangabad) में बांध (dams) से 44.065 क्यूसिक पानी छोड़े जाने से निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। वहीं बालोद में बाढ़ ( floods) के कारण सियादेवी मंदिर का रास्ता बंद हो गया। गुरुर ब्लॉक के कई गांवों का मुख्यालय से संपर्क टूट गया है।

निचले इलाकों में पानी भरा
मप्र (Madhya Pradesh) में मानसून के अंतिम दिनों में हो रही बारिश किसानों (farmers) के लिए वरदान साबित हो रही है। सितंबर के पहले जो नदी-नाले और बांध पानी को तरस रहे थे, 15 दिन की बारिश में सभी भर गए हैं, जिससे रबी की फसलों की सिंचाई के लिए किसानों को मुश्किल का सामना नहीं करना पड़ेगा। जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट (Tulsiram Silavat) ने कहा कि हाल ही में सक्रिय हुए मानसून के चलते 75 फीसदी बड़े और 60 फीसदी छोटे व 70 फीसदी मध्यम डेम भरे हैं। अभी भी मानसून सक्रिय ( Monsoon active) है और सितंबर अंत तक सभी डेम (dame) लबालब हो जाएंगे, जिससे किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हो सकेगा।

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