इंदौर

INDORE : ‘सखी’ ने दिखाई सही राह, तनाव और गलत संगत के कारण उठाया ऐसा कदम

अपनी मनमर्जी से जीने नहीं देते माता-पिता…बेटी ने की शिकायत
इंदौर। युवा पीढ़ी (Young Generation) पर अपने तरीके से जीने का जुनून सवार हो रहा है। सोशल मीडिया (social media) पर दोस्त बनाकर अपने परिवार के खिलाफ ही खड़े हो रहे हंै। ऐसा ही एक मामला महिला बाल विकास विभाग ( Department of Women and Child Development) के वन स्टॉप सेंटर (One Stop Center) ‘सखी’ के समक्ष पहुंचा।
शहर की एक 21 साल की युवती ने पोस्ट के जरिए अपने माता-पिता पर मानसिक रूप से परेशान करने की शिकायत दर्ज कराई। पीडि़ता ने शिकायत में कहा कि उसके घरवाले उसे उसके मुताबिक जीवन जीने नहीं दे रहे हैं। उसे ताने मारते हैं, यहां-वहां जाने से रोकते हैं। वह अपने पैरों पर खड़े होकर पैसे कमाना चाहती है, लेकिन वह जो रास्ता अपना रही थी उस पर घरवालों को आपत्ति थी। वन स्टॉप सेंटर प्रशासक वंचना सिंह परिहार (Vanchana Singh Parihar) ने बताया कि पीडि़ता के पिता की कमाई बहुत ज्यादा नहीं है। वह प्राइवेट जॉब करते हैं, इसलिए वह ग्रेजुएशन कर उनकी मदद करना चाहती थी। एक कंपनी में जॉब सर्च की, लेकिन उसमें वह ऑनलाइन फ्रॉड (Online Fraud) में फंस गई। कंपनी ने गलती पर फाइन भरने को कहा तो उसने बिना घरवालों को बताए दोस्तों से उधार लेकर फाइन भर दिया। इस दौरान सोशल मीडिया (social media)  पर एक लडक़े से दोस्ती हुई। घरवालों को पता चला तो उन्होंने रोकना-टोकना शुरू कर दिया। एक दिन पीडि़ता घर छोडक़र चली गई। घरवालों ने गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। ढूंढने पर पता चला कि वह दोस्त के घर के पास कमरा लेकर रह रही है। घरवाले पहुंचे और उसे घर लेकर आए, लेकिन वह मानसिक दिक्कत के चलते दोबारा घर छोडक़र चली गई। फिर उसे दोस्त के घर पर ढूंढा, मगर वह वहां नहीं थी। पता चला कि वह एक कमरा लेकर रह रही है।

केस समझा…फिर की काउंसलिंग
केस वर्कर श्रद्धा सिसौदिया ने पीडि़ता के बयान के आधार पर केस को समझा। पीडि़ता चाहती थी कि उसके परिवार वालों को समझाया जाए कि उसे मानसिक रूप से परेशान नहीं करें, ताने नहीं मारें, दोस्त के परिवार वालों का भविष्य में कोई नुकसान नहीं करें। पीडि़ता और उसके माता-पिता, भाई के भी बयान लिए गए और फिर सबकी काउंसलिंग की गई। पीडि़ता युवती फिर भी होस्टल में रहने की बात कर रही थी। वह खुद पैसा कमाएगी और खर्चा उठाएगी, लेकिन सेंटर प्रशासक परिहार ने उसको समझाया, कॅरियर गाइडेंस दिया गया। पीडि़ता ने भी अपनी गलती मानी और अब सोशल नेटवर्किंग से किसी से संपर्क स्थापित नहीं करेगी और पढ़ाई पर ही अपना ध्यान लगाएगी। काउंसलिंग के बाद सभी खुश होकर घर रवाना हुए।

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