
इंदौर। इंदौर में शेयर ट्रेडिंग और ऑनलाइन इंवेस्टमेंट के नाम पर देशभर में करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने वाले संगठित गिरोह के खिलाफ क्राइम ब्रांच पुलिस ने एक और बड़ी सफलता हासिल की है। फर्जी बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले इस हाई-प्रोफाइल रैकेट में लगातार जारी कार्रवाई के तहत क्राइम ब्रांच ने लंबे समय से फरार चल रहे एक और आरोपी समर्थ बरदेला को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़ा गया आरोपी निरंजनपुर स्थित रॉयल अमर ग्रीन कॉलोनी का रहने वाला है। इससे पहले क्राइम ब्रांच इस गिरोह के कई सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार कर उनसे भारी मात्रा में फर्जी पासबुक, सिम कार्ड, मोबाइल और स्कार्पियो गाड़ी ज़ब्त कर चुकी है।
इंदौर शहर में बढ़ते साइबर अपराधों और करोड़ों की ठगी करने वाले गिरोहों के खिलाफ पुलिस आयुक्त के निर्देशन में क्राइम ब्रांच लगातार सघन कार्रवाई कर रही है। थाना परदेशीपुरा में दर्ज फरियादी की शिकायत की जांच के दौरान क्राइम ब्रांच ने फर्जी बैंक खातों के जरिए नेटवर्क चलाने वाले संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया था।पूर्व में गिरफ्तार आरोपी जय सूर्यवंशी और जतिन हरियाले से पूछताछ व तकनीकी विश्लेषण के बाद पुलिस ने आकाश विश्वकर्मा, प्रवीण पाल और आशीष पूरी को गिरफ्तार किया था।
इसी कड़ी में अब क्राइम ब्रांच की टीम ने कार्रवाई करते हुए मामले में फरार चल रहे आरोपी समर्थ बरदेला पिता महेंद्र बरदेला, निवासी रॉयल अमर ग्रीन कालोनी, निरंजनपुर, थाना लसूड़िया को दबोच लिया है। जांच में सामने आया है कि आरोपी समर्थ और उसके साथी भोले-भाले लोगों के नाम से बैंक खाते खुलवाकर उनकी पूरी बैंकिंग किट चेकबुक, पासबुक, एटीएम और सिम साइबर ठगों के मास्टरमाइंड तक पहुंचाते थे। इन बैंक खातों का उपयोग देश के अलग-अलग राज्यों में शेयर ट्रेडिंग और ऑनलाइन निवेश के नाम पर की गई ठगी के पैसों को मंगाने और ट्रांसफर करने में किया जाता था।
खातों की जांच में अब तक करोड़ों रुपये के संदिग्ध वित्तीय लेन-देन सामने आए हैं। क्राइम ब्रांच गिरफ्तार आरोपियों के संपत्ति संबंधी ब्यौरे के लिए नगर निगम से पत्राचार भी कर रही है। क्राइम ब्रांच डीसीपी राजेश त्रिपाठी के मुताबिक, आरोपी समर्थ से पूछताछ में फर्जी खातों की नेटवर्क श्रृंखला और मास्टरमाइंड से जुड़ी कई नई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं, जिसके आधार पर गिरोह के अन्य सहयोगियों की तलाश तेज कर दी गई है।
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