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नेपाल ने सीमेंट का एक्सपोर्ट किया शुरू, पहली खेप पहुंची भारत

नई दिल्ली । पड़ोसी देश नेपाल (Nepal) ने पहली बार भारत को सीमेंट का एक्सपोर्ट (Nepal Cement Export to India) शुरू किया है. नेपाल से सीमेंट की पहली खेप उत्तर प्रदेश के सीमा से लगे एक चेक पोस्ट से होते हुए भारत में पहुंची है. नेपाल के नवलपरासी जिले में पल्पा सीमेंट इंडस्ट्रीज (Cement Industries) ने सुनौली बॉर्डर से सीमेंट की 3,000 बोरियों की पहली खेप भारत भेजी है. सरकार ने अपने वार्षिक बजट में नेपाली कच्चे माल का इस्तेमाल कर सीमेंट निर्यात करने वाली कंपनियों को आठ प्रतिशत नकद सब्सिडी देने की घोषणा की थी. इसके बाद से ही नेपाल के सीमेंट उद्योग भारत को इस बिल्डिंग मैटेरियल के निर्यात को लेकर उत्साहित थे.

आगे भी जारी रहेगा निर्यात
पल्पा सीमेंट के जनसंपर्क कार्यालय जीवन निरुआला ने कहा कि आज हमने भारत को लगभग 3,000 बोरी सीमेंट का निर्यात किया. अब हम इसे दैनिक आधार पर मांग के अनुसार निर्यात करेंगे. उद्योगपतियों ने भारत और नेपाल के बीच शुरू हुए इस व्यापारिक डेवलेपमेंट का स्वागत किया. नेपाल अब इस बिल्डिंग मैटेरियल में आत्मनिर्भर हो गया है.

नेपाल की उत्पादन क्षमता
नेपाल में 50 से अधिक सीमेंट कंपनियां काम करती हैं. उनमें से पल्पा सीमेंट इंडस्ट्रीज लिमिटेड सहित 15 सीमेंट और क्लिंकर दोनों का उत्पादन करते हैं. मीडिया रिपोर्टों से पता चलता है कि कंपनियों की कुल सीमेंट उत्पादन क्षमता 22 मिलियन टन है. उद्योगपतियों का कहना है कि नेपाली सीमेंट उत्पादों को भारतीय बाजार में कड़ी कीमत प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है.

व्यापार घाटा होगा कम
पाल्पा सीमेंट इंडस्ट्रीज लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक शेखर अग्रवाल ने कहा कि सीमेंट निर्यात भारत के साथ नेपाल के व्यापार घाटे को 15 प्रतिशत तक कम कर सकता है. उन्होंने कहा कि भारतीय बाजार में ओपीसी की तुलना में पीपीसी सीमेंट की मांग अधिक थी. पल्पा सीमेंट इंडस्ट्रीज रोजाना 1,800 टन सीमेंट और 800 टन क्लिंकर का उत्पादन कर रही है, जबकि इसकी 3,000 टन सीमेंट उत्पादन की क्षमता है.

मुश्किलों से जूझ रहा सीमेंट उद्योग
नेपाल सीमेंट प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के मुताबिक, पड़ोसी देश में 150 अरब नेपाली मुद्रा के सीमेंट एक्सपोर्ट करने की क्षमता है. नेपाल का सीमेंट उद्योग अपनी विशाल क्षमता के बावजूद बाजार की समस्याओं से जूझ रहा है. इस उद्योग के पास नेपाल में सीमेंट की खपत के लिए बड़ा बाजार मौजूद नहीं हैं. इस वजह से ये उद्योग समस्याओं से जूझ रहा है.

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