उप्रः आत्मनिर्भरता और समावेशी विकास का बजट

– सियाराम पांडेय ‘शांत’

उत्तर प्रदेश सरकार ने 5 लाख 50 हजार 270 करोड़ रुपये का सर्व समावेशी विकास आधारित अपना पांचवां पूर्ण पेपरलेस बजट पेश किया। यूपी के राजनीतिक इतिहास का यह अबतक का सबसे बड़ा बजट है। केंद्र सरकार के बाद उत्तर प्रदेश सरकार देश का पहला राज्य बन गया है जिसने पेपरलेस बजट पेश करने का साहस दिखाया है। इस बजट में समग्र विकास अगर सरकार की सोच-समझ का केंद्रीय तत्व रहा तो किसानों को साधने में सरकार की ऊर्जा कुछ ज्यादा लगती नजर आई। वर्ष 2022 में चुनाव होना है और प्रतिपक्ष नए कृषि कानूनों के मुद्दे को न केवल हवा दे रहा है बल्कि जगह-जगह किसान पंचायतों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है। ऐसे में सरकार की पहली चिंता किसानों को अपने पक्ष में लाने की है। इस निमित्त बजट में बहुत कुछ ऐसे प्रस्ताव भी हैं जो किसानों को न केवल मजबूती देंगे बल्कि उनके आक्रोश के ज्वार को कम करने और दिली तौर पर उन्हें सरकार के करीब लाने में भी सहायक होंगे।

उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार ने पहले साल 2017-18 में ही किसानों को समर्पित 3 लाख 84 हजार करोड़ का बजट पेश किया था। इसके बाद का साल उसने औद्योगिक विकास को जरूर समर्पित किया लेकिन किसानों के विकास का समुचित ध्यान रखा। वर्ष 2018-19 में 4.28 लाख का बजट पेश किया था। वर्ष 2019-20 का बजट 4लाख 79 हजार करोड़ का रहा। इस बजट में सरकार ने यूं तो महिला सशक्तीकरण पर विशेष फोकस किया था लेकिन उसमें भी गांव और किसान के उत्थान को सर्वोपरि रखा था। वर्ष 2020 -21 का बजट उसने युवाओं को समर्पित किया था। वह बजट भी 5 लाख 12 हजार करोड़ का था। देखा जाए तो योगी सरकार ने अपने हर बजट के आकार को बढ़ाया ही है और इस बजट में भी उसने पूर्व बजट के मुकाबले अगर 38 हजार करोड़ का इजाफा किया है तो इसे उसकी प्रदेश के सम्यक विकास की चिंता के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

विपक्ष इसे चुनावी और लोकलुभावन बजट कह रहा है। सत्ता में जो भी दल होता है, वह अपने राजनीतिक हितों को प्राथमिकता देता है लेकिन इन सबके बाद यह बजट यह नहीं बताता कि इसमें समाज के किसी वर्ग की जाति-धर्म के आधार पर अनदेखी हुई हो। सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास की अवधारणा को यह बजट संबल प्रदान करता है। उत्तर प्रदेश के वित्तमंत्री सुरेश खन्ना ने विषम कोरोना काल में यह बजट पेश किया है। इस समय बजट को लेकर सभी के दिल में आशंका तो थी ही कि पता नहीं, बजट में क्या कुछ होगा लेकिन यह बजट भी केंद्र सकार के बजट के सत्य प्रतिलिपि की तरह ही रहा। इसमें विकास को तो फोकस किया ही गया, सामाजिक सरोकारों, शिक्षा, संस्कृति, स्वास्थ्य, खेती-किसानी, व्यवसाय और सरल-सहज औद्योगिक वातावरण का भी ध्यान रखा गया। यह अपने आप में बड़ी बात है। गांव और किसान, मजदूर और कारीगर, कलाकार और साहित्यकार इस बजट के केंद्र में रहे। 11 लाख के यूपी गौरव सम्मान की घोषणा को कमोवेश इसी रूप में देखा-समझा जा सकता है।

राज्य के वित्तमंत्री ने कृषि और ऋषि यानी चिंतक दोनों ही का जिक्र कर भारतीय संस्कृति और उसकी शालीन परंपरा को महत्व देने की कोशिश की है। बजट पूर्व उनका यह कहना कि ‘यकीन हो तो कोई रास्ता निकलता है, हवा की ओट भी लेकर चिराग जलता है, उनके बजट के प्रस्तुतीकरण में हर क्षण दिखा। न केवल हवा की ओट लेकर चिराग जला बल्कि उसने अपनी आभा बनाए भी रखी। अगर यह कहा जाए कि यह बजट यूं तो युवाओं, किसानों व महिलाओं पर केंद्रित है तो कदाचित गलत नहीं होगा। किसानों को नाबार्ड से रियायती दरों पर ऋण उपलब्ध कराने के लिए ब्याज अनुदान योजना के तहत 400 करोड़ रुपये और 100 करोड़ रुपये की आत्मनिर्भर कृषक समन्वित विकास योजना के संचालन की घोषणा को इसी रूप में देखा जा सकता है। मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के लिए 600 करोड़, किसानों को मुफ्त पानी की सुविधा देने के लिए 700 करोड़ रुपये आवंटित कर, बंटाई किसानों को भी किसानों के लिए 5 लाख का बीमा योजना में शामिल कर और प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान के लिए 15 हजार सोलर पंपों की स्थापना का लक्ष्य निर्धारित कर सरकार ने किसानों को यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह राजनीति में नहीं, धरातल पर काम करने में यकीन रखती है। प्रदेश में अधिक उत्पादन वाली फसलों के चिन्हीकरण, ब्लॉक स्तर पर कृषक उत्पादन संगठनों की स्थापना और इस निमित्त 100 करोड़ रुपये का प्रावधान कर किसानों को मुफ्त पानी की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए 700 करोड़ रुपये देने का वायदा कर सुरेश खन्ना ने विपक्ष के मुंह से किसान राजनीति का निवाला छीनने की कोशिश भी की है।

राज्य के लखनऊ, वाराणसी, कुशीनगर और गौतमबुद्धनगर में 4 इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाने की भी बजट में घोषणा की गई है। यह भी बताया गया है कि अलीगढ़, आजमगढ़, मुरादाबाद व श्रावस्ती एयरपोर्ट का विकास लगभग पूर्ण हो गया है चित्रकूट और सोनभद्र एयरपोर्ट मार्च, 2021 तक पूरी तरह बन जाएंगे। महिला शक्ति केंद्रों की स्थापना के लिए 32 करोड़ रुपये की व्यवस्था, प्रत्येक तहसील में महिला हेल्प डेस्क की स्थापना का वायदा कर सरकार ने यह बताने और जताने की कोशिश की है कि वह महिलाओं के मामलों को लेकर बेहद गंभीर है। एक जिला- एक उत्पाद योजना के लिए 250 करोड,औद्योगिक पार्क की स्थापना के लिए 100 करोड़, मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के लिए 100 करोड़, विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के लिए 30 करोड़ की व्यवस्था यह बताने के लिए काफी है कि सरकार विकास के लिहाज से किसी भी सेक्टर को अछूता रखने के पक्ष में नहीं है।

प्रधानमंत्री सड़क योजना के लिए 5 हजार करोड़, पूर्वांचल एक्सप्रेस वे के लिए 1107 करोड़, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस वे के लिए 860 करोड़, बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे परियोजना के लिए 1492 करोड़, गंगा एक्सप्रेस वे परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण हेतु 7200 करोड़ रुपये और निर्माण कार्य के लिए 489 करोड़ रुपये बजटीय व्यवस्था कर सरकार ने किास के प्रति अपनी पूर्ण प्रतिबद्धता का इजहार किया है। 11,076 करोड़ की अनुमानित लागत वाली कानपुर मेट्रो रेल परियोजना के लिए वित्तीय वर्ष 2021-2022 के बजट में 597 करोड़ का आवंटन और जुलाई तक इसके ट्रायल रन का आत्मविश्वास मायने रखता है। आवास के लिए 10029 करोड़, अमृत योजना के लिए 2200 करोड़, स्मार्ट सिटी के लिए 2000 करोड़, कान्हा गौशाला के लिए 80 करोड़, मुख्यमंत्री समग्र सम्पदा विकास के लिए 1000 करोड़, पीएम आवास ग्रामीण के लिए 7000 करोड़, राष्ट्रीय रोजगार गारंटी के लिए 5500 करोड़ का प्रावधान इस विषम कोरोना काल में प्रदेश के हर रहवासी का मनोबल बढ़ाता है। लखनऊ में एयरपोर्ट के सामने नादरगंज में 40 एकड़ क्षेत्रफल में पीपीपी मॉडल पर अत्याधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी कॉम्प्लेक्स का निर्माण , जेवर एयरपोर्ट के समीप एक इलेक्ट्रानिक सिटी की स्थापना की घोषणा काबिले तारीफ है।

अयोध्या में निर्माणाधीन एयरपोर्ट का नाम मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम हवाई अड्डा अयोध्या रखकर और इसके लिए 101 करोड़ रुपये की बजट व्यवस्था कर सरकार ने बेहद सराहनीय काम किया है। अयोध्या स्थित सूर्यकुंड के विकास सहित अयोध्या नगरी के सर्वांगीण विकास की योजना हेतु बजट में 140 करोड़ रुपये की व्यवस्था और लखनऊ में राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल के निर्माण हेतु 50 करोड़ रुपये की घोषणा कर सरकार ने अपने वायदे को हर हाल में पूरा कर दिखाने का विश्वास जताया है। राज्य में आयुर्वेद को बढ़ावा देने और लखनऊ-पीलीभीत में आयुर्वेद विद्यालयों के निर्माण की बात कर उसने भारतीय चिकित्सा पद्धति को पुनजीर्वित करने के अपने प्रयासों का जिक्र भी किया है।

कुल मिलाकर बेहद संतुलित और सर्वसमावेशी बजट है। इस बजट का क्रियान्यन ठीक से हो और राजस्व घाटे से निपटने में सरकार सफल हो, इतनी कामना तो की ही जानी चाहिए। यह बजट प्रदेश को नयी ऊंचाई देगा, ऐसा विश्वास तो किया ही जाना चाहिए।

(लेखक हिन्दुस्थान समाचार से संबद्ध हैं।)

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