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पीडि़त महिला को मौत के मुंह से तो बचा लाए डाक्टर्स, मगर जिंदा रहने के लिए अब हर दिन 1500 रुपए का इलाज जरूरी

March 17, 2026

बॉम्बे हास्पिटल में 19 लाख से ज्यादा रुपए का इलाज कर 67 दिन में

सहायता के लिए आज भागीरथपुरा कांड से पीडि़त परिवार कलेक्टर से गुहार लगाएगा
इंदौर। शहर के चर्चित प्रदूषित पानी कांड (Contaminated Water Scandal) से पीडि़त भागीरथपुरा (Bhagirathpura) निवासी 67 वर्षीय महिला मरीज को बॉम्बे हास्पिटल (Bombay Hospital) वालों ने 67 दिन बाद डिस्चार्ज कर दिया है। इस दौरान इलाज का 19 लाख से ज्यादा रुपए का बिल बना है। इसका भुगतान जिला प्रशासन (District Administration) करेगा। अब मरीज को घर लाने के बाद इलाज पर हर दिन 1500 रुपए खर्च हो रहे हैं। इधर डाक्टर्स का कहना है कि इलाज अभी भी लम्बा चलेगा, जबकि सात सदस्यों वाले परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वह हर दिन इलाज का 1500 रुपए खर्च वहन कर सके। इसलिए आज पीडि़ता पार्वती के परिजन इलाज सम्बन्धित आर्थिक सहायता के लिए कलेक्टर से गुहार लगाने जा रहे हैं।



  • भागीरथपुरा में प्रदूषित पानी से उल्टी-दस्त, डायरियावाले कांड की पीडि़ता महिला के पुत्र प्रदीप कोण्डला का कहना है कि बॉम्बे हास्पिटल के डाक्टर्स महिला मरीज पार्वती कोण्डला को मौत के मुंह से तो बाहर खींच लाए हैं, मगर हास्पिटल से घर लाते वक्त से लेकर आज तक वह बिस्तर से न उठ सकती है, न खड़ी हो सकती है व न ही भोजन कर सकती है। शरीर का बांया हिस्सा ऊपर से नीचे तक लकवे की चपेट में है। इसके अलावा दाहिने हाथ-पैर लकवे से तो मुक्त हैं , मगर वह भी लगभग सुन्न हैं। डाक्टर्स का कहना है कि इनका इलाज लम्बा चलेगा। इन्हें हर दिन नियमित फिजियोथैरेपी की जरूरत है और एक्सपर्ट केयरटेकर की जरूरत है। हर दिन फिजियोथैरेपी और दवाइयों का खर्च लगभग 1500 रुपए आ रहा है।

    इलाज के दौरान 18 दिन वेंटिलेटर पर रही पीडि़ता
    9 मार्च 2026 को बॉम्बे हास्पिटल से डिस्चार्ज करने के बाद 10 मार्च से कल तक 10 हजार 500 रुपए खर्च हो चुके हैं। कोण्डला ने बताया कि मम्मी की उम्र 67 वर्ष है। प्रदूषित पानी पीने से लगातार उल्टी-दस्त के चलते 28 दिसम्बर 2025 को उन्हें 78 नम्बर स्कीम के विवेक मेमोरियल में भर्ती कराया था, जहां उनका 1 जनवरी 2026 तक इलाज चला। यहां लगभग डेढ़ लाख रुपए खर्च हुए, जिसका भुगतान मेडिक्लेम पॉलिसी वालों ने किया। इलाज के दौरान डाक्टर्स ने बताया कि वायरल इंफेक्शन के चलते मम्मी जीबीएस मतलब गिलियन-बैरे सिंड्रोम की चपेट में आ गई है, इस कारण शरीर सुन्न होता चला गया । डाक्टर बोले कि इस सम्बंध में उन्होंने अपने स्थानीय विधायक कैलाश विजयवर्गीय को जानकारी दी। उन्होंने तत्काल अधिकारियों और डाक्टर्स से बात कर मम्मी को बॉम्बे हॉस्पिटल में भर्ती कराया। यहां इलाज के दौरान लगभग 18 दिन वेंटिलेटर पर रखा गया। आखिरकार डाक्टर मम्मी को मौत के मुंह से तो निकाल लाए, मगर उन्हें पैरों पर खड़ा होने में कितना समय लगेगा, यह कहना मुश्किल है। 9 मार्च को मम्मी को डिस्चार्ज कर घर ले आए हंै। डाक्टर्स के अनुसार, तब से घर पर इलाज जारी है। घर पर मैं मेरी पत्नी, बच्चों और माता-पिता सहित हम सात सदस्य हैं। मैं जीवन बीमा निगम में इंश्योरेंस का काम करता हूं। बड़ी मुश्किल से घर का खर्चा चला पाता हूं। ऐसे में 1500 रुपए रोज इलाज का खर्च उठा पाना मुश्किल ही नहीं, बल्कि नामुमकिन है, इसीलिए आज कलेक्टर से गुहार लगाने जनसुनवाई में जा रहे हैं।

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