
नई दिल्ली। “एक सेब रोज खाओ, डॉक्टर दूर रहेंगे” वाली कहावत तो सबने सुनी है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आज हम जिन सेबों (Apple) को खाते हैं, उनकी सैकड़ों किस्में इतिहास में खो चुकी हैं? नॉर्थ कैरोलिना (North Carolina) के रिटायर्ड केमिकल इंजीनियर टॉम ब्राउन (Retired Chemical Engineer Tom Brown) ने यह सच्चाई बदलने का बीड़ा उठाया। रिटायरमेंट के बाद उन्होंने 25 साल मशीनों के पीछे नहीं, बल्कि खोए हुए सेबों की तलाश में लगाए और अब दुनिया उन्हें ‘एप्पल हंटर’ के नाम से जानती है।
एक इत्तेफाक से शुरू हुआ 25 साल का सफर
टॉम का यह सफर 1990 के दशक के अंत में एक किसान बाजार में शुरू हुआ। वहां उन्होंने सेबों की दुर्लभ किस्में देखीं, जिनके स्वाद और नाम के बारे में उन्होंने पहले कभी नहीं सुना था। जब उन्हें पता चला कि ये पारंपरिक किस्में व्यावसायिक खेती में जगह नहीं पा रही हैं और धीरे-धीरे खत्म हो रही हैं, तो उन्होंने इन्हें बचाने का निर्णय लिया।
पुराने बागों और जंगलों में ‘सेब का शिकार’
टॉम ने पूर्वी अमेरिका के ग्रामीण इलाकों की खाक छानी, पुराने रिकॉर्ड्स पढ़े और बुजुर्गों से जानकारी ली। कई बार दुर्लभ पेड़ उन्हें सुनसान खेतों या पुराने घरों के पिछवाड़े में मिले। केवल पेड़ ढूंढना ही मुश्किल नहीं था, उसे बचाना असली चुनौती थी। उन्होंने ग्राफ्टिंग यानी कलम बांधने की तकनीक सीखी और बूढ़े पेड़ों की टहनियों से नए पौधे उगाए।
1200 किस्मों का जीवित खजाना
पिछले ढाई दशकों में टॉम ने 1200 से अधिक लुप्त प्रजातियों को फिर से उगाया। उनका बगीचा आज एक ‘लिविंग म्यूजियम’ की तरह है। यहां वे सेबों का अध्ययन करते हैं और उनकी आनुवंशिक विशेषताओं को सुरक्षित रखते हैं। टॉम जनता को पौधे उपलब्ध कराते हैं, ताकि यह विरासत केवल एक जगह तक सीमित न रहे। इन प्राचीन किस्मों का भविष्य की खेती और बदलती जलवायु में उपयोग भी महत्वपूर्ण है।
स्वाद, संस्कृति और इतिहास का संरक्षण
टॉम का प्रयास केवल फलों को बचाने तक सीमित नहीं है। हर सेब की किस्म के पीछे एक क्षेत्र, संस्कृति और परंपरा जुड़ी है। आज बड़े शेफ और किसान इन प्राचीन स्वादों की ओर लौट रहे हैं। टॉम ने यह साबित किया कि एक व्यक्ति ठान ले, तो विलुप्त होती जैव विविधता को भी नया जीवन दिया जा सकता है। उनकी मेहनत से आने वाली पीढ़ियां सिर्फ लाल और हरे सेब ही नहीं, बल्कि 1200 प्राचीन किस्मों का स्वाद भी चख सकेंगी।
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