नई दिल्ली। कैंसर के इलाज (cancer treatment) को लेकर वैज्ञानिक लगातार नई तकनीकों (scientific techniques) पर काम कर रहे हैं। खासतौर पर आंखों के कैंसर का उपचार जटिल माना जाता है, क्योंकि मौजूदा तरीकों में रोशनी प्रभावित होने का खतरा रहता है। इसी बीच एक नई रिसर्च में दावा किया गया है कि सूअर के वीर्य से तैयार आईड्रॉप ट्यूमर की वृद्धि रोकने में मददगार हो सकती है। यह अध्ययन साइंस एडवांसेज जर्नल में प्रकाशित हुआ है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, इस आईड्रॉप का प्रयोग फिलहाल चूहों पर किया गया है और शुरुआती नतीजे सकारात्मक बताए गए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह दवा आंख के पिछले हिस्से यानी रेटिना तक पहुंचने में सक्षम है, जिससे ट्यूमर की ग्रोथ पर असर पड़ सकता है और आंखों की रोशनी बचाने में मदद मिल सकती है।
रिसर्च में यह भी दावा किया गया है कि इस तकनीक का उपयोग बच्चों में होने वाले रेटिनोब्लास्टोमा के इलाज में किया जा सकता है। अभी तक आंखों के कैंसर के उपचार के लिए इंजेक्शन, कीमोथेरेपी और लेजर थेरेपी जैसे तरीके अपनाए जाते हैं, जिनसे आंख के अन्य हिस्सों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। नई आईड्रॉप को ऐसे विकल्प के रूप में देखा जा रहा है, जो सीधे प्रभावित हिस्से तक दवा पहुंचा सके।
जानकारों के मुताबिक, पारंपरिक उपचार जैसे कीमोथेरेपी या लेजर थेरेपी से आंख की रोशनी प्रभावित होने का जोखिम बना रहता है। शोध में कहा गया है कि सूअर के वीर्य से बनी इस आईड्रॉप में मौजूद विशेष कण दवा को रेटिना तक पहुंचाने में मदद करते हैं और इससे अन्य हिस्सों को नुकसान नहीं होता। हालांकि यह दावा अभी शुरुआती स्तर पर है।
रिपोर्ट के अनुसार, इस आईड्रॉप में मौजूद एक्सोसोम कैंसररोधी तत्वों को प्रभावित कोशिकाओं तक पहुंचाते हैं। चूहों पर किए गए प्रयोग में पाया गया कि इससे ट्यूमर की वृद्धि धीमी हुई। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह तकनीक भविष्य में अन्य बीमारियों, जैसे अल्जाइमर, के इलाज में भी उपयोगी हो सकती है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इंसानों पर उपयोग से पहले व्यापक क्लीनिकल ट्रायल की जरूरत होगी। फिलहाल इसे शुरुआती वैज्ञानिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है।
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