
इंदौर। रिंग रोड पर बढ़ते ट्रैफिक के दबाव और चल रहे कामों के कारण हो रही अव्यवस्थाओं के चलते लंबी दूरी की बसों के आवागमन पर यातायात पुलिस ने रोक लगाई थी, ताकि यातायात व्यवस्था सुचारू बनी रहे, लेकिन बस चालक इस नियम की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। यातायात पुलिस को चकमा देकर ये बसें रहवासी इलाकों से होकर गुजर रही हैं, जिससे स्थानीय लोगों और वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
देवास नाका की ओर जाने वाली कई स्लीपर बसें स्टार चौराहे से एडवांस एकेडमी क्षेत्र (कोकिला बेन हॉस्पिटल) से होते हुए तुलसी नगर, महालक्ष्मी नगर मैदान के रास्ते बॉम्बे हॉस्पिटल चौराहे तक पहुंच रही हैं। यह पूरा मार्ग घनी आबादी वाला क्षेत्र है, जहां पहले से ही यातायात का काफी दबाव बना रहता है।
ऐसे में भारी वाहनों की आवाजाही से दुर्घटना की आशंका भी बढ़ गई है। देर शाम ये बसें जब कोकिला बेन वाले कट से मुड़ती हैं, तो यहां वाहन चालकों के लिए परेशानी बढ़ जाती है। ये सडक़ पहले ही सिंगल लेन है। साइड में निर्माण कार्य हो रहा है। ऐसे में स्लीपर बसें पूरी सडक़ पर कब्जा कर लेती हैं, जिससे छोटे वाहन चालकों को निकलने के लिए जगह ही नहीं मिल पाती। यही हाल आगे तुलसी नगर वाली पुलिया क्षेत्र की बन रही सडक़ पर भी होता है। स्थानीय रहवासियों का कहना है कि ये हालात अब सडक़ों पर जाम की स्थिति बना रहे हैं, साथ ही दुर्घटना का खतरा भी बढ़ रहा है।
बॉम्बे हॉस्पिटल चौराहे पर है पॉइंट
बसों को स्टार चौराहे से बायपास होकर निकलना है, लेकिन सवारियों के चक्कर में बस चालक इस तरह दूसरों की जान जोखिम में डाल रहे हैं। रेडिसन तक तो निगरानी हो जाती है, लेकिन बॉम्बे हॉस्पिटल पर नो इंट्री पॉइंट होने के बावजूद यातायात पुलिस को इस इलाके आती बसें नजर नहीं आ रही है। प्रतिबंध लागू होने के बाद भी इन बसों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। देर शाम के साथ ये हाल अलसुबह रेडिसन के हैं, जहां एक साथ पांच से छह लंबी दूरी की बसें आकर रुकती हैं और सवारियों छोड़ती हैं। इससे यहां यातायात जाम होता है, क्योंकि सुबह स्कूल बसों के साथ ही यहां स्टाफ बसें भी निकलती हंै। ज्यादा खराब हालात सवारियों को लेने के लिए ऑटो, ई-रिक्शा और टैक्सी संचालक करते हैं, जो रॉन्ग साइड आने से भी गुरेज नहीं करते।
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