
इन्दौर। नगर निगम (Municipal council) के चर्चित नामांतरण घोटाले (mutation scam) में लाभान्वित रहे 360 व्यक्तियों (360 beneficiaries) के नाम पर नगर निगम द्वारा नोटिस जारी किया गया है। इन सभी व्यक्तियों से कहा गया है कि 3 दिन के अंदर जाकर बताइए कि आपके द्वारा किसके माध्यम से नामांतरण करवाया गया।
अग्निबाण द्वारा भंडाफोड़ कर सामने लाए गए नगर निगम के नामांतरण घोटाले में एक तरफ जहां तीन अपर आयुक्त की जांच कमेटी द्वारा जांच की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ जांच के लिए सबूत तैयार करने का काम भी चल रहा है। नगर निगम के उपायुक्त की आईडी का उपयोग करते हुए 360 लोगों की संपत्ति को दूसरे के नाम पर चढ़ा दिया गया। इस तरह अन्य व्यक्ति को इन संपत्ति का मालिक बना दिया गया। इनमें से करीब 125 लोगों द्वारा इस दस्तावेज के आधार पर संपत्ति की रजिस्ट्री करवाने का काम भी कर लिया गया। निगम के अपर आयुक्त आकाश सिंह ने बताया कि इस मामले में अब उन सभी 360 लोगों के नाम पर नोटिस जारी किए गए हैं, जिनके नाम पर संपत्ति चढ़ाई गई थी। नोटिस में 3 दिन में उनसे जवाब मांगा गया है। उन्हें बताना होगा कि उन्होंने यह नामांतरण किसके माध्यम से करवाया है। यह सभी व्यक्ति अपना जवाब दे सकें इसके लिए उनके नोटिस निगम के सहायक राजस्व अधिकारी और बिल कलेक्टर के माध्यम से भेजे गए हैं। निगम के इन अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि हर हालत में इन लाभान्वितों को निगम के मुख्यालय तक लेकर आएं।
सरकार ने कहा-14 कम्प्यूटर से हुआ काम
नामांतरण का यह खेल कौन से कम्प्यूटर से किया गया यह जानने में नगर निगम के अधिकारियों की रुचि थी। अधिकारियों का मानना था कि यह जानकारी सामने आ जाएगी तो फिर दोषी को सामने लाने में दिक्कत नहीं आएगी। ई-नगर पालिका द्वारा भोपाल से कल यह जानकारी दी गई कि मार्च और अप्रैल महीने में 14 कम्प्यूटर के माध्यम से उक्त संपत्तियों के नाम बदलने का खेल किया गया है। इन कम्प्यूटर के आईपी नंबर भी सामने आ गए हैं। यह जानकारी सामने आने के बाद अब स्मार्ट सिटी की तकनीकी टीम द्वारा इस जानकारी का परीक्षण शुरू कर दिया गया है।
पाटिल को दिया संपत्ति कर का काम
इसी बीच नगर निगम में कल राजस्व विभाग में अधिकारियों के बीच कार्य विभाजन में फेरबदल किया गया है। इस फेरबदल में सहायक राजस्व अधिकारी मयूर पाटिल को पूरे शहर के संपत्ति कर के मामले का प्रभारी बना दिया गया है। अब तक उनके पास में जोन क्रमांक 1 से 11 तक का ही यह कार्य था। ध्यान रहे कि पाटिल को नामांतरण घोटाले में भी संदिग्ध माना जा रहा है।
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