भोपाल। मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड (Waqf Board) के पुनर्गठन में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों (Non-Muslim members) की नियुक्ति को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस ने इस फैसले का विरोध करते हुए इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की घोषणा की है, जबकि भाजपा ने इसे कानून के अनुरूप और पारदर्शिता की दिशा में उठाया गया कदम बताया है।
कांग्रेस ने उठाए कानूनी सवाल
कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि वक्फ अधिनियम से जुड़ा मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। उनका कहना है कि जब तक शीर्ष अदालत इस विषय पर अंतिम फैसला नहीं दे देती, तब तक इस तरह की नियुक्तियां नहीं की जानी चाहिए थीं।
उन्होंने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश सरकार द्वारा वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन और उसमें गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने का निर्णय कई कानूनी प्रश्न खड़े करता है। मसूद ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस इस नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी।
पूर्व मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पीसी शर्मा ने भी इस फैसले की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए ऐसे विवादास्पद फैसले ले रही है। उनके अनुसार, यह कदम राजनीतिक उद्देश्य से उठाया गया है।
भाजपा ने बताया कानून के अनुरूप फैसला
वहीं, नवगठित मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सनवर पटेल ने कहा कि बोर्ड का पुनर्गठन पूरी तरह कानूनी प्रावधानों के तहत किया गया है। उन्होंने विपक्ष पर इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने और लोगों को भ्रमित करने का आरोप लगाया।
प्रदेश सरकार में मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य है, जिसने वक्फ बोर्ड में दो हिंदू सदस्यों को शामिल किया है। उनके अनुसार, इस फैसले को धार्मिक चश्मे से नहीं बल्कि प्रशासनिक और कानूनी दृष्टि से देखा जाना चाहिए।
‘वक्फ बोर्ड का दायरा व्यापक’
विश्वास सारंग ने कहा कि वक्फ बोर्ड का काम केवल मस्जिदों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और जनहित से जुड़े कई विषयों पर कार्य करता है।
भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने भी फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि बोर्ड के सभी सदस्य, चाहे उनका धर्म कोई भी हो, गरीबों और जरूरतमंदों के हित में काम करेंगे। उन्होंने कहा कि वक्फ संपत्तियां सार्वजनिक हित से जुड़ी हैं और उनका उपयोग नियमानुसार होना चाहिए।
नए बोर्ड का गठन
मध्य प्रदेश सरकार ने हाल ही में 10 सदस्यीय वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन किया है। इसमें सनवर पटेल को बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि मनोज मालपानी और अनिमेष भार्गव को गैर-मुस्लिम सदस्यों के रूप में शामिल किया गया है। इन्हीं नियुक्तियों को लेकर अब राजनीतिक और कानूनी बहस तेज हो गई है।
फिलहाल, इस मुद्दे पर कांग्रेस के सुप्रीम कोर्ट जाने के ऐलान और भाजपा के कानूनी बचाव के बीच विवाद गहराता नजर आ रहा है। अब इस मामले में आगे की कानूनी और राजनीतिक गतिविधियों पर सबकी निगाहें टिकी हैं।
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