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सपा सांसद की अजीब दलील, कहा-लड़कियां बच्चे पैदा करने लायक हो जाएं तो कर देनी चाहिए शादी, उम्र बढ़ने पर..

नई दिल्ली। लड़कियों (girls) की शादी की न्यूनतम आयु (Minimum marriage) 18 साल से बढ़ाकर 21 किए जाने के प्रस्ताव पर समाजवादी पार्टी (सपा) के कई नेता आपत्ति जाहिर कर चुके हैं। अबु आजमी, शफीकुर्रहमान बर्क के बाद अब सपा सांसद (SP MP) एसटी हसन (ST Hassan) ने शुक्रवार को केंद्र के प्रस्ताव का विरोध करते हुए अजीबोगरीब दलीलें दीं। हसन ने कहा कि जब लड़कियां बच्चे पैदा करने लायक (childbearing) हो जाएं तो उनकी शादी कर देनी चाहिए। अपने तर्कों में उन्होंने यह भी कह डाला कि उम्र बढ़ने पर बच्चे पोर्न फिल्में देखने लगते हैं और उनमें अनुशासनहीनता बढ़ जाती है।

हसन ने कहा, ”महिलाओं की प्रजनन आयु 16-17 वर्ष से 30 वर्ष तक होती है। 16 साल की उम्र से ही शादी के प्रस्ताव आने लगते हैं। यदि शादी में देर की जाती है तो इसके दो नुकसान हैं, एक है बांझपन की संभावना। दूसरा यह कि जब कोई बूढ़ा हो जाता है तो बच्चे व्यवस्थित नहीं होते हैं। जब आप जिंदगी के आखिरी दशक में तब भी आपके बच्चे स्टूडेंट ही होते हैं। हम प्राकृतिक प्रक्रिया को तोड़ रहे हैं।”


सपा सांसद ने कहा, ”मैं मानता हूं कि जब एक लड़की परिपक्व हो जाती है और प्रजनन की उम्र हासिल कर लेती है, उसकी शादी हो जानी चाहिए। यदि एक लड़की 16 साल में परिपक्व हो जाती है तो उसकी शादी 16 में हो सकती है। यदि वह 18 की उम्र में वोट कर सकती है तो वह शादी क्यों नहीं कर सकती है? बच्चे जब बड़े होते हैं तो अनुशानहीनता बढ़ जाती है, जब वे पोर्न वीडियो और फोटो देखने लगते हैं।”

सांसद ने आगे कहा, ”हमने लिव इन रिलेशन को मंजूरी दे दी है, जो दिखाता है कि अनुशासनहीनता बढ़ गई है। इस उम्र में हार्मोनल बदलवा अपराध की ओर ले जा सकते हैं। इससे पहले गुरुवार को सपा नेता अबु आजमी ने भी कहा था कि शादी की उम्र बढ़ाए जाने से लड़कियां गलत रास्ते पर जा सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि यह कानून ऐसे लोग ला रहे हैं, जिनके अपने बच्चे नहीं हैं। इस मुद्दे पर ग्रामीणों और आदिवासियों की राय ली जानी चाहिए।

बर्क ने भी किया विरोध का ऐलान, दिया गरीबी का तर्क, अखिलेश का किनारा
इससे पहले सपा सांसद शफीकुर्ररहमान बर्क ने भी इस प्रस्ताव के विरोध का ऐलान किया। उन्होंने कहा, ”भारत एक गरीब देश है और हर कोई बेटी की शादी कम उम्र में करना चाहता है। मैं संसद में इस बिल का समर्थन नहीं करूंगा। हालांकि, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने सांसद के बयान से किनारा कर लिया और कहा कि उनकी पार्टी प्रगतिशील है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने लड़कियों और महिलाओं के विकास के लिए कई योजनाएं लॉन्च की हैं। उन्होंने कहा, ”समाजवादी पार्टी का इन बयानों से कुछ लेनादेना नहीं है।”

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