
इंदौर। ऐसा लगता है इस बार मानसून (Monsoon) इंदौर (Indore) से रूठा ही रहेगा। रोजाना बादल तो घिरते हैं मगर जोरदार बरसते नहीं, जिसके चलते इस बार अभी तक मात्र 440 मिमी यानी साढ़े 17 इंच बारिश ही हुई है। नतीजतन तेज बारिश (Heavy rain) की झड़ी एक बार भी ना लगने के कारण इंदौर जिले के सभी प्रमुख तालाब भी अपनी क्षमता से नहीं भर सके और यशवंत सागर भी ओवरफ्लो नहीं हुआ। यही हाल प्रदेश के बांधों के भी हैं। सभी 54 बड़े बांध लगभग 36 फीसदी तक खाली हैं।
इस बार मौसम विशेषज्ञों ने भविष्यवाणी की थी कि अलनीनो के प्रभाव से मानसून कमजोर रहेगा। मगर यह आश्चर्य की बात है कि इंदौर के आसपास तो पानी गिरता रहा, मगर शहर में बीच-बीच में रिमझिम या फुहारें ही बरसती रही। अभी तक एक बार भी 3 से 4 इंच पानी एक साथ नहीं बरसा, जिसके चलते नदी, नाले, तालाब लबालब हो सकें। यहां तक कि अभी यशवंत सागर ही 5 से 6 फीट खाली है, तो पीपल्यापाला, बिलावली, लिम्बोदी, सिरपुर सहित अन्य तालाब भी अपनी क्षमता के अनुरूप नहीं भर सके हैं। दूसरी तरफ प्रमुख बांधों की जानकारी सामने आई है। 54 जो बड़े बांध हैं, उनमें 60 से 64 प्रतिशत तक पानी भरा है, यानी 36 फीसदी खाली हैं। जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने कल इन सभी बांधों की समीक्षा की और मॉनिटरिंग करने और बाढ़ नियंत्रण कक्ष को लगातार 24 ही घंटे चालू रखने के निर्देश भी दिए। राजघाट, बरघी बांध अवश्य 86 फीसदी तक भर गए हैं, तो कोलार, बारना, बाण सागर, गांधी सागर, इंदिरा सागर और तवा बांध तो 46 फीसदी से लेकर 76 फीसदी तक ही भर सके हैं, वहीं ओंकारेश्वर बांध में तो मात्र 30 फीसदी ही पानी अब तक जमा हुआ है। यहां तक कि आधे से ज्यादा मानसून बीत गया और अभी तक सिर्फ 4 बांधों के गेट ही अतिरिक्त पानी निकासी के लिए खोलना पड़े हैं। पूरे प्रदेश में अभी तक 584 मिमी बारिश ही औसत रूप से दर्ज हुई है, जो कि 12 से 15 फीसदी कम है। इंदौर में भी सामान्य और अच्छी बारिश 34-35 इंच मानी जाती है, जिसमें से अभी लगभग आधी बारिश ही मौसम विभाग के खाते में दर्ज हुई।
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