भोपाल

तेजी से खराब हो रही है मप्र की मिट्टी की सेहत

  • अधिक उर्वरकों के उपयोग से 90 प्रतिशत तक नाइट्रोजन घटी

भोपाल। जांच और शोध से यह साफ हो गया है कि कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग ही ज्यादा कोरोना संक्रमित हुए। चौंकाने वाला तथ्य यह भी है कि इन दिनों गेहूं, चावल, दाल, ज्वार-बाजरा तथा हरी सब्जी के उपयोग से भी शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता उतनी विकसित नहीं हो रही है जितनी होना चाहिए। इसका कारण खेत में अधिक उर्वरक के उपयोग से मिट्टी में 40 फीसदी तक जिंक, आयरन और मैगनीज की कमी होना है।
हर खाद्यान्न में मौजूद यही वे तत्व हैं तो हर व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। कृषि विभाग की मृदा परीक्षण प्रयोगशाला में 2020-21 में 4401 मिट्टी के नमूने लिए गए। जांच 12 मुख्य व सूक्ष्म पोषक तत्वों की हुई। सर्वाधिक 90 प्रतिशत तक कमी नाइट्रोजन की मिली। इससे पौधों का हरा भाग व दाना नहीं बनता। फॉस्फोरस की कमी 10 प्रतिशत नमूनों में मिली है। इसी कारण पौधे मिट्टी से तत्व नहीं ले पा रहे हैं। पोटाश भी 12 प्रतिशत नमूनों में कम मिली है।

जिंक, आयरन और मैगनीज का असर
मिट्टी के 40 प्रतिशत नमूनों में जिंक 0.2 पार्टस प्रति मिलियन तक निकला है जबकि इसका मानक 0.5 से अधिक है। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता घटी है। मिट्टी के 41 प्रतिशत नमूनों में कमी मिली है। इससे शरीर में ब्लड बनने की प्रक्रिया बाधित होती है। 6 मैगनीज की मात्रा 36 व सल्फर की मात्रा 6 प्रतिशत नमूनों में कम मिली। इससे तेल वाली फसल हल्की होने से तेल कम मिल रहा है।

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