
भोपाल। विशेष सत्र न्यायालय ने शुक्रवार को प्री मेडिकल टेस्ट (पीएमटी) 2010 में फर्जीवाड़ा करने वाले छह आरोपितों को पांच-पांच साल की सजा सुनाई है और सभी आरोपितों को सजा काटने के लिए जेल भेज दिया। कोर्ट ने आरोपितों पर 4100-4100 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इस तरह के अपराधों से परीक्षा की गरिमा व पवित्रता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इससे योग्य विद्यार्थियों का शिक्षा की ओर से रुझान कम हो रहा है। इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए आरोपितों को कठोर दंड देने की जरूरत है। सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक राघवेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि व्यापम ने वर्ष 2010 में पीएमटी का आयोजन किया था। जितेंद्र कुमार व दीपक प्रजापति का सेंटर गुना के शासकीय स्नातकोत्तर कालेज में पड़ा था। ये दोनों परीक्षार्थी परीक्षा देने नहीं पहुंचे और उन्होंने अपनी जगह पर साल्वर को परीक्षा देने भेज दिया।
इन्हें सुनाई गई सजा
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