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अगस्त में मंहगाई के कारण जनता पस्त, आटा-दाल के बाद चावल के दाम बढ़े

नई दिल्ली। देश की जनता को हाल-फिलहाल महंगाई  के मोर्चे पर राहत मिलने की उम्मीद कम ही दिखाई दे रही है, रिजर्व बैंक (RBI) और केंद्र सरकार (Central Govt) लगातार महंगाई को काबू करने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन इसमें सफलता बेहद सीमित मिल पा रही है, आज एमपीसी की बैठक (RBI MPC Meet) के बाद रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास (RBI Governor Shaktikanta Das) ने खुद स्वीकार किया कि आने वाले समय में महंगाई की दर नरम पड़ने के बाद भी ऊंची बनी रहेगी। इस बीच यह सप्ताह महंगाई के मोर्चे पर और बुरा साबित हुआ है. इस सप्ताह के दौरान पहले ही सीएनजी (CNG), पीएनजी (PNG), दही (Curd), चावल (Rice) जैसी चीजों के दाम बढ़ चुके हैं, अब रेपो रेट बढ़ने (Repo Rate Hike) के बाद होम लोन (Home Loan) समेत अन्य लोन की ईएमआई (EMI) भी बढ़ने वाली है।

इतनी रहने वाली है आने वाले समय में महंगाई

महंगाई की बात करें तो रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि भारत में चीजों के दामों पर ग्लोबल फैक्टर्स का असर हो रहा है, दुनिया भर में महंगाई रिकॉर्ड स्तर पर है। भारत में महंगाई की ऊंची दरों का सामना करना पड़ रहा है, जून लगातार छठा ऐसा महीना रहा, जब खुदरा महंगाई रिजर्व बैंक के अपर लिमिट से ज्यादा रही। भू-राजनीतिक घटनाक्रमों में तेजी से आ रहे बदलाव के बीच ग्लोबल फूड प्राइसेज में नरमी, यूक्रेन से गेहूं के निर्यात की पुन: शुरुआत, घरेलू बाजार में खाने के तेल के दाम में नरमी और अच्छे मानसून के कारण खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी से आने वाले समय में महंगाई के मोर्चे पर राहत मिल सकती है। हालांकि इसके बाद भी खुदरा महंगाई की दर ऊंची बनी रहने वाली है, रिजर्व बैंक के अनुसार, 2022-23 में महंगाई की दर रिजर्व बैंक के अपर लिमिट से ऊपर 6.7 फीसदी रहने का अनुमान है। सितंबर तिमाही में इसकी दर 7.1 फीसदी, दिसंबर तिमाही में 6.4 फीसदी और मार्च 23 तिमाही में 5.8 फीसदी रहने का अनुमान है।

इन कारणों से बढ़ रही चावल की कीमतें

बीते कुछ दिनों में चावल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है, दरअसल मानसून देश के कई हिस्सों में कमजोर पड़ा है और इस कारण चावल की बुवाई वाले कई राज्यों में कम बारिश की स्थिति उत्पन्न हुई है। बारिश की कमी से चावल की बुवाई कम हो रही है, जो इस खरीफ सीजन की उपज पर नकारात्मक असर डाल सकता है। रिजर्व बैंक ने खुद स्वीकार किया है कि खरीफ फसलों की कम बुवाई चिंताजनक है और इसपर नजरें बनाए रखने की जरूरत है, हालांकि रिजर्व बैंक ने यह आश्वस्त करने का भी प्रयास किया है कि देश में चावल का पर्याप्त भंडार है। हालांकि इसके बाद भी जून महीने से अब तक चावल की विभिन्न किस्मों के दाम 30 फीसदी तक बढ़े हैं, इसका एक कारण बांग्लादेश, ईरान, इराक, सऊदी अरब जैसे देशों से डिमांड में आई तेजी है, आपको बता दें कि भारत चावल का सबसे बड़ा निर्यातक देश है।

FMCG उत्पादों के भी दाम बढ़े

कच्ची सामग्रियों के दाम बढ़ने, जीएसटी आदि के कारण एफएमसीजी उत्पादों के दाम भी बढ़ रहे हैं, अब पैक्ड दही-लस्सी पर जीएसटी के हालिया फैसले का असर देखिए, एफएमसीजी कंपनी Britannia ने हाल ही में अपने दही के उत्पादों के दाम बढ़ाए हैं। कंपनी भारतीय बाजार में 80g, 150g और 400g पैक्ड दही बेचती है, अभी तक बाजार में 80g पैक्ड दही की कीमत 10 रुपये थी, लेकिन इस सप्ताह से बाजार में यही 80 ग्राम वाला पैक्ड ब्रिटानिया का दही 15 रुपये में बिक रहा है। यानी कंपनी ने इसके दाम 10 रुपये से सीधे बढ़ाकर 15 रुपये कर दिए हैं, ग्राहकों को अब 10 रुपये वाला दही लेने के लिए 5 रुपये ज्यादा चुकाने पड़ रहे हैं।

 

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