भोपाल न्यूज़ (Bhopal News)

…फिर भी कड़ाके की ठंड को तरसा है दिसंबर

  • बर्फबारी से मध्य प्रदेश में सर्दी बढ़ी, दो दिन बाद शीतलहर चलने के आसार

भोपाल। पश्चिमी विक्षोभ के असर से उत्तर भारत के पहाड़ों पर बर्फबारी शुरू हो गई है। हवा का रुख भी उत्तरी बना हुआ है। जिसके चलते मध्य प्रदेश में सिहरन और बढ़ गई है। इसी क्रम में गुरुवार को मध्य प्रदेश में सबसे कम 4.5 डिग्री सेल्सियस तापमान नौगांव में दर्ज किया गया। राजधानी सहित 23 शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से कम रहा। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक शनिवार से कड़ाके की सर्दी शुरू होने की संभावना है। इस बार दिसंबर कड़ाके की ठंड को तरसा है। सिर्फ 3 बार पारा 10 डिग्री से नीचे पहुंचा, लेकिन अब तक एक भी बार 8 डिग्री से नीचे नहीं आ सका। 8 दिसंबर को सीजन का सबसे कम तापमान 8.6 डिग्री दर्ज किया गया। 17 साल में तीसरी बार ऐसा हुआ जब दिसंबर में इतनी कम ठंडक रही।
मौसम विज्ञान केंद्र से मिली जानकारी के मुताबिक पिछले 24 घंटों के दौरान मध्य प्रदेश के सभी संभागों के जिलों में मौसम मुख्यत: शुष्क रहा। न्यूनतम तापमान जबलपुर एवं नर्मदापुरम संभाग के जिलों में काफी गिरे। शेष सभी संभागों के जिलों में न्यूनतम तापमान में कोई विशेष परिवर्तन नहीं हुआ। न्यूनतम तापमान लगभग सामान्य रहे। मौसम विज्ञान केंद्र के पूर्व वरिष्ठ मौसम विज्ञानी अजय शुक्ला ने बताया कि वर्तमान में एक पश्चिमी विक्षोभ अफानिस्तान पर बना हुआ है। उसके प्रभाव से उत्तरी पाकिस्तान पर एक प्ररित चक्रवात बन गया है। उधर पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से उत्तर भारत के पहाड़ों पर बर्फबारी शुरू हो गई है। साथ ही हवा का रुख उत्तरी बना हुआ है।

उत्तर भारत की तरफ से सर्द हवाओं के कारण मध्य प्रदेश में ठंड बढ़ गई है। शुक्ला के मुताबिक बर्फबारी का सिलसिला शुक्रवार को भी जारी रह सकता है। शनिवार को पश्चिमी विक्षोभ के उत्तर भारत से आगे बढऩे के आसार हैं। उसके बाद मध्य प्रदेश में कड़ाके की सर्दी पडऩे की संभावना है। तब कई शहरों में शीतलहर भी चल सकती है। देश के उत्तरी इलाकों से आ रही सर्द हवा के कारण भोपाल में रात के वक्त ठंड और बढ़ गई। तापमान में गिरावट होने से पारा 10 डिग्री से नीचे पहुंच गया। सीजन में ऐसा तीसरी बार हुआ है। रात का तापमान 9.4 डिग्री रहा। इससे पहले 27 नवंबर और 8 दिसंबर को रात का तापमान 10 डिग्री से कम रहा था। 2006 और 2013 में भी दिसंबर में मौसम की यही स्थिति थी। इस बार जितने भी वेस्टर्न डिस्टरबेंस आए वह ज्यादा स्ट्रांग नहीं थे। इस कारण पहाड़ों पर भी बर्फबारी कम हुई। इसका असर यह हुआ कि जिस बर्फीली हवा के कारण हमारे यहां ठंडक पड़ती है वह बहुत कम पहुंची।

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