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इजराइल में सत्ता परिवर्तन संभव है? PM नेतन्याहू को हटाने का विपक्षी प्लान

नई दिल्ली: इजराइल और हमास में जारी जंग के बीच पूर्व प्रधानमंत्री यायर लैपिड ने बेंजामिन नेतन्याहू के तत्काल इस्तीफे की मांग की है. लैपिड ने एक अलग प्रधानमंत्री के नेतृत्व में नई सरकार के गठन की अपील की. इसके लिए उन्होंने संसद में अविश्वास मत की मांग की है. लैपिड ने हमास के 7 अक्टूबर के हमलों को रोकने में विफल रहने के लिए नेतन्याहू और सुरक्षा तंत्र की आलोचना की. लैपिड का मानना है कि नेतन्याहू ने लोगों का विश्वास खो दिया है और इस चुनौतीपूर्ण समय में देश का नेतृत्व करने के लिए एक नए प्रधानमंत्री की जरूरत है.

हमास के हमले के बाद, नेतन्याहू और एक अन्य विपक्षी नेता बेनी गैंट्ज़ युद्ध तक के लिए एक आपातकालीन सरकार बनाने पर सहमत हुए थे. हालांकि, लैपिड ने इस गठबंधन में शामिल होने से इनकार कर दिया था. बेंजामिन नेतन्याहू लिकुड पार्टी से आते हैं और यायर लैपिड सिर्फ नेतन्याहू के नेतृत्व के खिलाफ हैं. उनका कहना है कि प्रधानमंत्री लिकुड पार्टी का ही बने लेकिन नेतन्याहू की जगह उन्होंने नए प्रधानमंत्री के साथ नई सरकार के गठन का प्रस्ताव रखा.

नेतन्याहू की पार्टी ने लैपिड के प्रस्ताव को बताया “शर्मनाक”
नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने हालांकि पूर्व पीएम लैपिड के प्रस्ताव को खारिज किया है. पार्टी ने लैपिड की मांग को “शर्मनाक” करार दिया, जो युद्ध के समय उपयुक्त नहीं है. इजराइल और हमास के बीच जंग में जानमाल का काफी नुकसान हुआ है. हमास के हमले के जवाब में इजराइल की बमबारी शुरू होने के बाद से 11,500 से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे गए हैं. इस बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने एक प्रस्ताव पारित किया जिसमें गाजा में मानवीय आधार पर सीजफायर की अपील की. इसके बाद नेतन्याहू शासन ने हर रोज चार घंटे युद्धविराम पर सहमति दी है.

76 फीसदी यहूदी चाहते हैं नेतन्याहू का इस्तीफा
3 नवंबर के एक सर्वे में पाया गया कि 76% इजराइली चाहते हैं कि नेतन्याहू इस्तीफा दे दें. पिछले महीने हुए सर्वे से पता चलता है कि अगर अभी चुनाव हुए तो नेतन्याहू हार जाएंगे. हमास के हमले के तुरंत बाद किए गए सर्वे में 56 फीसदी यहूदी ऐसे थे जो नेतन्याहू को सत्ता से बेदखल करना चाहते थे. बेंजामिन नेतन्याहू 16 साल से सत्ता में हैं. अपने इस लंबे कार्यकाल के दौरान उन्होंने खुद को सुरक्षा के मोर्चे पर एक सख्त नेता के तौर पर स्थापित किया है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि वह उस फोकस से भटक गए हैं और अपनी कुर्सी बचाने पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं.


इजराइली संसद में नेतन्याहू गठबंधन के पास 64 सीटें
पिछले साल नेतन्याहू ने धुर दक्षिणपंथी धार्मिक पार्टियों के साथ गठबंधन में सरकार बनाई थी. अपने छोटे चरम-दक्षिणपंथी सहयोगियों के साथ 120 सीटों वाले संसद में लिकुड पार्टी के पास 64 सांसद हैं. अगर दक्षिणपंथी पार्टियां नेतन्याहू का साथ छोड़ती है तो उनकी कुर्सी जा सकती है, लेकिन इसे असंभव माना जाता है. अपने दक्षिणपंथी गठबंधन दलों के साथ मिलकर नेतन्याहू शासन ने वेस्ट बैंक में यहूदी बस्तियों का विस्तार किया है. इससे फिलिस्तीन अथॉरिटी का पावर कम हुआ.

प्रधानमंत्री नेतन्याहू पर गाजा पट्टी में हमास के शासन को बढ़ावा देने और फंडिंग करने जैसे आरोप लगते रहे हैं. 2007 में गाजा की सत्ता हमास के हाथ में जाने के बाद नेतन्याहू शासन ने फिलिस्तीन अथॉरिटी को कमजोर करने की मंशा के साथ गाजा को काफी फंडिंग दी है. आलोचक मानते हैं कि यह नेतन्याहू की लॉन्ग स्ट्रैटेजी का हिस्सा था, ताकि गाजा से शांतिपूर्ण आंदोलन खड़ा ना हो.

बेंजामिन नेतन्याहू का विरोध
बेंजामिन नेतन्याहू का देश में लंबे समय से विरोध हो रहा है. मसलन, उनके संवैधानिक बदलावों को लेकर महीनों तक यहूदी समुदाय ने सड़कों पर प्रदर्शन किया, लेकिन आखिरकार वह अपने मनसूबे में कामयाब हुए. नेतन्याहू पर भ्रष्टाचार के कई केस चल रहे हैं. ताजा बदलावों के जरिए उन्होंने देश की सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति को अपने मुताबिक डिजाइन किया है.

नेतन्याहू ने चूक के लिए सुरक्षा एजेंसियों को बताया जिम्मेदार
2 नवंबर को, देश के दक्षिण में, जहां हमास के हमले हुए थे, नेतन्याहू की लिकुड पार्टी के एक नगरपालिका अधिकारी ने लाइव टीवी पर पार्टी से इस्तीफा दे दिया. इजराइल के रक्षा मंत्री, सैन्य प्रमुख और देश की घरेलू खुफिया एजेंसी शिन बेट के प्रमुख ने सुरक्षा चूक के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदारी ली. बीते दिन खुद बेंजामिन नेतन्याहू ने माना कि गलतियां हुई है.

पीएम नेतन्याहू ने सोमवार को एबीसी न्यूज से कहा, “सरकार की जिम्मेदारी लोगों की रक्षा करना है और स्पष्ट रूप से वह जिम्मेदारी पूरी नहीं हुई.” नेतन्याहू ने एक ट्वीट में रक्षा और खुफिया अधिकारियों पर उन्हें गलत आकलन पेश करने का आरोप लगाया था. विरोध के बाद उन्होंने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया. उनका कहना है कि इस मामले की जांच होगी लेकिन युद्ध के बीच वह किसी तरह की जांच नहीं चाहते.

नेतन्याहू ने 30 अक्टूबर को पत्रकारों से बातचीत में कहा, “सिर्फ एक चीज जिसके लिए मैं इस्तीफा देना चाहता हूं वह है हमास. हम उन्हें इतिहास के कूड़ेदान में फेंकने जा रहे हैं.” हमास की बंधक में कमोबेश 240 इजराइली और विदेशी नागरिक फंसे हैं. तेल अवीव में हाल ही में एक रैली में, बंधकों में एक के परिवार ने नेतन्याहू के तुरंत इस्तीफे की मांग की.

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